भाद्रपद शुक्ल पक्ष नवमी, रविवार को जसोल के श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह मंगला आरती से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने कतारों में लगकर श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बनासा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में दर्शन किए। उन्होंने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। दिनभर जसोल धाम में भक्ति का माहौल बना रहा। इस मौके पर भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादं) और छप्पन भोग के लाभार्थी आहान नायर रहे। वे ममता-आनंद नायर के बेटे हैं और मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले हैं, फिलहाल मुंबई और दुबई में रहते हैं। इस परिवार ने जसोल धाम के सभी मंदिरों में, जिसमें श्री राणीसा भटियाणीसा का मंदिर भी शामिल है, भोजन प्रसाद और छप्पन भोग चढ़ाया। भोग चढ़ाने के बाद प्रसाद को जसोल धाम आए श्रद्धालुओं में बांटा गया। अन्नपूर्णा प्रसादं में भी बड़ी संख्या में भक्तों ने भोजन किया। लाभार्थी परिवार ने सभी समाज की कन्याओं का पूजन भी किया। कन्याओं को फल, प्रसाद और दक्षिणा दी गई। उन्हें अन्न प्रसादं भी खिलाया गया और उनका आशीर्वाद लिया गया। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ नवमी पर मालाणी की लोक-संस्कृति की सुंदर झलक भी दिखी। पारंपरिक गैर नृत्य और ढोल-थाली की आवाजें खास आकर्षण का केंद्र रहीं। लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से जसोल धाम के भक्ति भरे माहौल में लोक-संस्कृति की छटा बिखेरी। मंदिर समिती ने की व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर संस्थान ने कई इंतजाम किए थे। वाहन पार्किंग से लेकर दर्शन और बाहर निकलने तक, भक्तों के लिए तय रास्ते और कतारें बनाई गई थीं। जूते-चप्पल रखने, हाथ-पैर धोने, पीने का साफ पानी, प्रसाद चढ़ाने, भीड़ को संभालने, मिस्टिंग सिस्टम, पैदल पुल, अन्नपूर्णा प्रसादं, आराम करने की जगह और अच्छी पार्किंग की व्यवस्था थी। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से श्रद्धालुओं को लगातार जरूरी जानकारी और निर्देश दिए जा रहे थे। मंदिर परिसर और मुख्य जगहों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई। साफ-सफाई और शौचालय की व्यवस्था के साथ बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद भक्तों के लिए व्हीलचेयर और गोल्फ कार्ट की सुविधा भी थी। संस्थान के प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल ने बताया - नवमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए दर्शन, सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल, प्रसाद, भोजन प्रसादी, स्वच्छता एवं भीड़ प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। संस्थान के कर्मचारी एवं सुरक्षा कर्मी निर्धारित स्थानों पर तैनात रहे। श्रद्धालुओं को निर्धारित कतारों के माध्यम से सुगमता से दर्शन करवाए गए। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास रहता है कि जसोल धाम आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम दर्शन के साथ स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण मिले। उन्होंने बताया कि संस्थान परिसर में प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक भजन-कीर्तन (राती जोगा) की परंपरा निरंतर चलती है। इसमें स्थानीय भजनी अपनी मधुर वाणी में श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बनासा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरू जी की महिमा से जुड़े भजनों की प्रस्तुतियां देते हैं। भजनों के माध्यम से होने वाली आराधना में श्रद्धालु देर रात तक उपस्थित रहकर भाव-विभोर होते हैं।
रात्रि जागरण भी होगा
इसी क्रम में भाद्रपद शुक्ल पक्ष नवमी की रात्रि में भी रात्रि-जागरण का आयोजन होगा। इसमें स्थानीय भजनियों सहित बाड़मेर के हड़वा से आए मांगणियार कलाकार विभिन्न भजनों के माध्यम से श्री राणीसा भटियाणीसा सहित जसोल धाम के विभिन्न देवस्थानों की महिमा का गुणगान करेंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहकर भक्ति एवं आराधना का धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।