झालावाड़ में 11वें आयुर्वेद दिवस पर राजकीय आयुर्वेद औषधालय में एक जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इस दौरान वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. रिंकेश कुमार यादवेंद्र ने ओपीडी में आए मरीजों को विटामिन डी के महत्व, इसकी कमी के कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में बताया। डॉ. यादवेंद्र ने जानकारी दी कि विटामिन डी शरीर में कैल्शियम को सही से इस्तेमाल करने और हड्डियों को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी जरूरी है। हमारा शरीर सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में आने पर खुद ही विटामिन डी बनाता है। बदलती लाइफस्टाइल से विटामिन डी की कमी के मामले बढ़े हालांकि, आजकल की बदलती लाइफस्टाइल, घर और ऑफिस में ज्यादा समय बिताने, धूप से दूर रहने और कम शारीरिक गतिविधि के कारण विटामिन डी की कमी के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शरीर के हर दर्द को विटामिन डी की कमी से जोड़ना ठीक नहीं है। कमर, घुटने, गर्दन या मांसपेशियों में दर्द के और भी कई कारण हो सकते हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन डी की दवा या सप्लीमेंट लेना भी सही नहीं है। चिकित्साधिकारी ने बताया कि कई बार विटामिन डी की कमी के कोई साफ लक्षण नहीं दिखते। कुछ लोगों को हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, थकान और शारीरिक क्षमता में कमी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। बच्चों में इसकी गंभीर कमी होने पर हड्डियों के विकास पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने मरीजों को नियमित और सुरक्षित तरीके से धूप लेने, संतुलित और पौष्टिक खाना खाने और शारीरिक गतिविधि बनाए रखने की सलाह दी। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी की जांच कराने और सप्लीमेंट लेने को कहा। उन्होंने यह भी साफ किया कि विटामिन डी न तो कोई चमत्कारी दवा है और न ही इससे डरने की जरूरत है। सही जानकारी, सही जांच और डॉक्टर की सलाह पर ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।