झालावाड़ के पीजी कॉलेज में महिला प्रकोष्ठ की देखरेख में चल रहा चार सप्ताह का रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर संपन्न हो गया। शिविर में 60 छात्राओं को मुश्किल परिस्थितियों में खुद की सुरक्षा करने की तकनीकें सिखाई गईं। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को पंच, किक सहित विभिन्न बचाव तकनीकों का प्रैक्टिकल अभ्यास कराया गया। उन्हें यह भी बताया गया कि आपात स्थिति में घबराने के बजाय सतर्कता, साहस और आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेना चाहिए। पीछा करने पर घबराएं नहीं, मदद मांगें पुलिस विभाग से आईं मास्टर ट्रेनर रचना चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को कई महत्वपूर्ण आत्मरक्षा तकनीकें प्रैक्टिकल के माध्यम से सिखाई गईं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पीछा कर परेशान करता है तो छात्राओं को घबराने के बजाय हिम्मत और सूझबूझ से काम लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सुरक्षित साधनों का इस्तेमाल कर खुद को बचाने के साथ जोर से आवाज लगाकर आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगनी चाहिए। सुरक्षित स्थान की ओर जाने पर जोर प्रशिक्षण में छात्राओं को समझाया गया कि किसी भी आपात स्थिति में सबसे पहले सुरक्षित स्थान की ओर जाने का प्रयास करें। इसके साथ ही आसपास मौजूद लोगों से सहायता लेने और परिस्थिति के अनुसार सतर्कता से कदम उठाने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं में आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विकसित करना रहा। लक्ष्य तय करें और हिम्मत न हारें समापन कार्यक्रम कॉलेज के ​​प्रिं​सिपल आर.के. मीना की मौजूदगी में हुआ। महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. अलका बागला ने छात्राओं से कहा कि वे अपना लक्ष्य तय करें और कभी हिम्मत न हारें। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जो महिला शक्ति के लिए अच्छा संदेश है। सतर्कता और आत्मविश्वास भी जरूरी मुख्य वक्ता राहुल चौधरी ने आत्मरक्षा के साथ सतर्कता, साहस और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने छात्राओं को मुश्किल परिस्थितियों में संयम बनाए रखते हुए सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। ये रहे मौजूद कार्यक्रम का संचालन सोनू खंडेलवाल ने किया, जबकि डॉ. प्रमिला शर्मा ने धन्यवाद दिया। इस मौके पर डॉ. सुमन खींची, रेणु मीणा, प्रियंका गर्ग, प्रियंका शर्मा, मनीषा मीणा, अर्चना मीणा समेत कई छात्राएं मौजूद थीं।