वन विभाग के उप वन संरक्षक (DFO) कार्यालय में सामने आए वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख), राजस्थान, जयपुर ने कार्यालय उप वन संरक्षक, झुंझुनूं में कार्यरत कनिष्ठ सहायक (स्टोर इंचार्ज) प्रहलाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर GA-55 सरकारी रसीदों के दुरुपयोग तथा टेंडर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप हैं। कार्यालय आदेश के अनुसार राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-13 के तहत यह कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, कोटा निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार निर्वाह भत्ता देय होगा। झुंझुनूं डीएफओ कार्यालय में वित्तीय गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं। पहले 3.37 लाख रुपए की टेंडर धरोहर राशि (ईएमडी) सरकारी खाते में जमा नहीं होने का मामला उजागर हुआ और इसके बाद वर्ष 2020 से नवीनीकरण पर रोक के बावजूद आरा मशीन संचालकों से नवीनीकरण शुल्क वसूलने का खुलासा हुआ। GA-55 रसीदों से वसूला गया शुल्क जांच के दायरे में आए दूसरे मामले में सामने आया है कि प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2020 से आरा मशीनों के नवीनीकरण पर रोक लगाए जाने के बावजूद कई संचालकों से नवीनीकरण शुल्क वसूला गया। इसके बदले विभाग की GA-55 सरकारी रसीदें जारी की गईं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कई संचालकों से नगद राशि लेकर सरकारी रसीदें काटी गईं। इन रसीदों पर सहायक वन संरक्षक (ACF) के हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब नवीनीकरण प्रक्रिया ही बंद थी तो शुल्क किस नियम के तहत लिया गया और क्या यह राशि सरकारी खाते में जमा भी हुई या नहीं। सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में हालांकि आरोप कनिष्ठ सहायक प्रहलाद सिंह की भूमिका पर केंद्रित हैं, लेकिन रसीदों पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर होने के कारण मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं माना जा रहा। जांच अब यह भी पता लगाएगी कि पूरी प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही तथा किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई। 3.37 लाख रुपए की टेंडर राशि भी बनी जांच का विषय इससे पहले सामने आए मामले में फतेहपुर की शारदा इंटरप्राइजेज ने वन विभाग के विकास कार्यों से जुड़े एक टेंडर की धरोहर राशि (ईएमडी) के रूप में 3 लाख 37 हजार रुपए 18 अगस्त को कार्यालय में नकद जमा कराए थे। आरोप है कि संबंधित राशि नकद लेने के बाद विभाग की GA-55 रसीद तो जारी कर दी गई, लेकिन 25 अगस्त तक भी राशि सरकारी बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई। सरकारी वित्तीय नियमों के अनुसार प्राप्त राशि का तत्काल लेखा दर्ज कर उसे सरकारी खाते में जमा करना अनिवार्य होता है। मामला सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारी कार्यालय से अनुपस्थित था, जिसके बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी। चार प्रमुख बिंदुओं पर चल रही जांच 500 रुपए से अधिक नकद लेने पर भी नियमों का सवाल राजस्थान सरकार के General Financial Accounts Rules (GFAR) के नियम-42 के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी एक प्रकरण में 500 रुपए से अधिक नकद राशि स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक सक्षम प्राधिकारी की विशेष अनुमति न हो। बड़ी राशि सामान्यतः चेक, बैंक ड्राफ्ट, बैंकर्स चेक अथवा ऑनलाइन माध्यम से ली जाती है। अब कई और रसीदों की होगी जांच प्रहलाद सिंह के निलंबन के बाद विभाग अब केवल 3.37 लाख रुपए के मामले तक सीमित नहीं रहेगा। वर्ष 2020 के बाद जारी की गई सभी संदिग्ध GA-55 रसीदों, आरा मशीनों से वसूले गए शुल्क, कैश बुक, बैंक जमा रिकॉर्ड और विभागीय अभिलेखों की जांच की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि सरकारी खाते में राशि जमा नहीं हुई या नियमों की अनदेखी कर शुल्क वसूला गया, तो मामला विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच का रूप भी ले सकता है।