झुंझुनूं में शनिवार को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत हुई। जिसमें आपसी सहमति से मामलों का निपटारा किया गया। दूसरी लोक अदालत (मई 2026) के बाद से अब तक के सभी मामलों को लोक अदालत के जरिए आपसी सहमति और समझौते से हल करने के लिए 11 बेंचों का गठन किया गया। लोक अदालत में ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से कुल 1 लाख 50 हजार 262 मामले सुनवाई के लिए रखे गए। इनमें से लगभग 1 लाख 37 हजार 948 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में 16 करोड़ 75 लाख 22 हजार 244 रुपए की अवॉर्ड राशि पारित हुई। विधिक सेवा प्राधिकरण के जिला सचिव एडीजे महेंद्र सोलंकी ने बताया- झुंझुनूं में पहले 10 मई को उस लोक अदालत के बाद जितने भी प्रकरण चल रहे थे- उन सबका ये आंकड़ा है। पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,09,315 मामलों का निस्तारण किया गया था। दूसरी लोक अदालत मई 2026 में हुई जिसमें 15 हजार मामलों को निपटारे के लिए चुना गया। इसके बाद के सभी मामलों को तीसरी लोक अदालत के जरिए निस्तारित किया गया है। लोक अदालत के लिए जिले में 11 न्यायिक और राजस्व अधिकारियों की बेंचों का गठन किया गया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश माधवी दिनकर के निर्देशन में लोक अदालत आयोजित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी ने बताया- लोक अदालत का उद्देश्य आपसी समझाइश और सहमति के जरिए विवादों का समाधान कर आमजन को सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। 1.37 लाख मामलों में से 1.28 लाख प्री-लिटिगेशन प्रकरण निस्तारित लोक अदालत में सबसे अधिक मामले प्री-लिटिगेशन श्रेणी के रहे। इस श्रेणी में अदालत में नियमित मुकदमा दर्ज होने से पहले समाधान के लिए रखे जाने वाले विवाद शामिल होते हैं। ऐसे कुल 1,37,382 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 1,28,773 का निस्तारण किया गया। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों में पहले से लंबित 12,880 प्रकरण भी लोक अदालत में रखे गए। इनमें से 9,175 मामलों का निस्तारण हुआ। इस तरह पूर्व से लंबित मामलों और मुकदमा दर्ज होने से पहले समाधान के लिए रखे गए प्रकरणों में समझौते और निस्तारण की प्रक्रिया अपनाई गई। चेक बाउंस से लेकर पारिवारिक विवादों तक सुनवाई राष्ट्रीय लोक अदालत में कई तरह के मामलों को शामिल किया गया। इनमें चेक बाउंस से जुड़े मामले, धन वसूली, वैवाहिक विवाद, मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), श्रम एवं रोजगार संबंधी विवाद और अन्य सिविल मामले शामिल रहे। इसके अलावा किराए, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा और विनिर्दिष्ट पालन से जुड़े मामलों के साथ राजस्व प्रकरणों को भी सुनवाई के लिए रखा गया। वैवाहिक विवादों में तलाक के मामलों को छोड़कर अन्य विवादों के समाधान पर ध्यान दिया गया। इन मामलों में संबंधित पक्षों को आपसी बातचीत और समझाइश के जरिए विवाद समाप्त करने का अवसर मिला। जहां दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी वहां नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की गई। 11 बेंच के माध्यम से हुआ निस्तारण मामलों की संख्या और प्रकृति को देखते हुए जिले में 11 न्यायिक एवं राजस्व अधिकारियों की बेंचों का गठन किया गया। जिला मुख्यालय के साथ खेतड़ी, चिड़ावा, पिलानी, उदयपुरवाटी, नवलगढ़, बुहाना और सूरजगढ़ क्षेत्र में भी न्यायिक व राजस्व अधिकारियों ने प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया में भाग लिया। जिला मुख्यालय पर पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अजय गोदारा, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम-2 कालूराम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. महेंद्र के. सिंह सोलंकी, न्यायिक मजिस्ट्रेट जया सैनी, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज मील, उपखंड अधिकारी रामकरण सिंह सहित न्यायिक अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने मामलों के निस्तारण में भाग लिया। खेतड़ी में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश प्रेमसिंह धनवाल, चिड़ावा में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश नरेंद्र सिंह, पिलानी में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश कुमार और उदयपुरवाटी में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल कुमार शर्मा सहित संबंधित अधिकारियों ने सुनवाई की। नवलगढ़, बुहाना और सूरजगढ़ क्षेत्र में भी न्यायिक मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों ने लोक अदालत की प्रक्रिया में भाग लिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों ने भी आयोजन में सहयोग किया। मुकदमेबाजी का समय और खर्च बचाने का माध्यम राष्ट्रीय लोक अदालत का प्रमुख उद्देश्य ऐसे विवादों को आपसी सहमति से सुलझाना है, जिनका समाधान बातचीत के जरिए संभव है। नियमित अदालतों में मामलों की सुनवाई के दौरान पक्षकारों को कई बार पेशियों पर आना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं। लोक अदालत में सहमति बनने पर मामलों का निस्तारण अपेक्षाकृत सरल तरीके से किया जा सकता है।