झुंझुनूं जिला परिषद के वार्ड नंबर-6 से भाजपा ने यहां पूर्व सांसद और पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार की बहू अनामिका पूनियां को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर, कांग्रेस से सुशीला सीगड़ा को टिकट मिला है। सुशीला पहले भाजपा में थीं, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर करीब 7 साल बाद उन्होंने कांग्रेस में वापसी कर ली। इसने घटना ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एक ओर नरेंद्र कुमार के परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है, तो दूसरी ओर सुशीला सीगड़ा के सामने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत साबित करने की चुनौती है। सुशीला का पंचायती राज में लंबा अनुभव रहा है। वे मंडावा विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा की प्रत्याशी रह चुकी हैं। वार्ड-6 का मुकाबला दो अलग-अलग राजनीतिक आधारों की परीक्षा है। सुशीला सीगड़ा के पास तीन बार प्रधान रहने का अनुभव, पंचायत राज में लंबे समय की सक्रियता और विधानसभा उपचुनाव लड़ने का अनुभव है। दूसरी ओर, अनामिका पूनियां को भाजपा के संगठन और नरेंद्र कुमार के परिवार की राजनीतिक पहचान का सहारा मिलेगा। टिकट नहीं मिला तो बदली पार्टी सुशीला सीगड़ा भाजपा से जिला परिषद के वार्ड-6 का टिकट मांग रही थीं। पार्टी ने इस सीट पर नरेंद्र कुमार की बहु अनामिका पूनियां को प्रत्याशी बना दिया, जिसके बाद सुशीला ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया। नामांकन के अंतिम दिन 16 अक्टूबर को सुशीला सीगड़ा झुंझुनूं के विद्यार्थी भवन पहुंचीं। यहां कांग्रेस जिलाध्यक्ष और मंडावा विधायक रीटा चौधरी ने उन्हें पार्टी का दुपट्टा पहनाकर कांग्रेस में शामिल कराया। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें वार्ड-6 से प्रत्याशी बनाया। सुशीला का तीन बार प्रधान रहने के कारण उनका क्षेत्रीय राजनीतिक अनुभव है। ऐसे में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उनका कांग्रेस में जाना पार्टी के टिकट बांटने और पुराने नेताओं को मौका देने के सवाल भी खड़े करता है। कांग्रेस के लिए यह फैसला एक अनुभवी स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारने का मौका है, वहीं भाजपा के लिए चुनौती यह होगी कि टिकट वितरण के बाद पैदा हुई नाराजगी का चुनाव पर कोई असर न पड़े। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर भाजपा ने वार्ड-6 से अनामिका पूनियां को टिकट देकर अपने पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के परिवार पर भरोसा जताया है। अनामिका पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की छोटी बहू हैं। नरेंद्र कुमार जिले की राजनीति में पूर्व सांसद और पूर्व विधायक के रूप में पहचान रखते हैं। जेठानी हर्षिनी कुलहरी भाजपा की जिलाध्यक्ष है। अनामिका की उम्मीदवारी को परिवार की राजनीतिक मौजूदगी के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है। जिला परिषद चुनाव में उनका मुकाबला ऐसी नेता से है, जो पंचायत समिति की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रही हैं और विधानसभा उपचुनाव भी लड़ चुकी हैं। परिवारवाद का आरोप कांग्रेस में शामिल होने के बाद सुशीला सीगड़ा ने नरेंद्र कुमार की कार्यशैली और भाजपा के टिकट वितरण पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है और सीमित दायरे के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिला प्रमुख की कुर्सी के समीकरण पर भी रहेगी नजर जिला परिषद में कुल 41 वार्ड हैं। जिला प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने से इस बार महिला प्रत्याशियों और उनके राजनीतिक समर्थन को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में वार्ड-6 का परिणाम भी जिला परिषद में दलों की स्थिति और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जाएगा।