झुंझुनूं जिला परिषद चुनाव में इस बार मुकाबला केवल 41 वार्डों में सदस्य चुनने तक सीमित नहीं है। भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के परिवारों से जुड़े प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से चुनाव में राजनीतिक साख, संगठनात्मक पकड़ और पारिवारिक प्रभाव की भी परीक्षा होगी। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार की दो बहुएं हर्षिनी कुलहरी और अनामिका पूनिया अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, पूर्व सांसद संतोष अहलावत की बहू और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की बेटी दीक्षा अहलावत भी मैदान में हैं। कांग्रेस ने भी पूर्व प्रधान सुशीला सीगड़ा और युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुधींद्र मूंड की पत्नी रंजना कुमारी धींवा सहित राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों को टिकट दिया है। जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित होने से कुछ महिला प्रत्याशियों की उम्मीदवारी को इस पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वार्ड 5 और 6: पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के परिवार की दो बहुएं मैदान में जिला परिषद चुनाव में पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार के परिवार की दो महिलाओं को भाजपा का टिकट मिलने की चर्चा है। उनकी पुत्रवधू हर्षिनी कुलहरी वार्ड 5 से चुनाव लड़ रही हैं। हर्षिनी निवर्तमान जिला प्रमुख रह चुकी हैं और वर्तमान में भाजपा की जिलाध्यक्ष हैं। उनके लिए यह चुनाव जिला परिषद की राजनीति में अपनी पकड़ और संगठनात्मक प्रभाव बनाए रखने की परीक्षा है। इसी परिवार की दूसरी पुत्रवधू अनामिका पूनिया को भाजपा ने वार्ड 6 से प्रत्याशी बनाया है। वह पहली बार जिला परिषद का चुनाव लड़ रही हैं। एक ही परिवार की दो बहुओं को आसपास के वार्डों से टिकट मिलने के बाद पार्टी के इस फैसले पर भी नजर है। हर्षिनी के सामने अपने राजनीतिक अनुभव को मतदाताओं के समर्थन में बदलने की चुनौती है, जबकि अनामिका के लिए पहली बार चुनाव लड़ते हुए जनसमर्थन हासिल करना अहम होगा। वार्ड 6: अनामिका के सामने तीन बार प्रधान रह चुकीं सुशीला वार्ड 6 में भाजपा की अनामिका पूनिया के सामने कांग्रेस ने सुशीला सीगड़ा को मैदान में उतारा है। सुशीला झुंझुनूं पंचायत समिति की तीन बार प्रधान रह चुकी हैं। वह पहले भाजपा में थीं, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव लड़ रही हैं। वार्ड 18: दो राजनीतिक परिवारों से जुड़ी हैं दीक्षा अहलावत भाजपा ने वार्ड 18 से दीक्षा अहलावत को प्रत्याशी बनाया है। दीक्षा पूर्व सांसद संतोष अहलावत की बहू और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की बेटी हैं। इस तरह उनकी उम्मीदवारी दो राजनीतिक परिवारों से जुड़ी है। जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण दीक्षा की उम्मीदवारी को भी राजनीतिक समीकरणों के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, जिला प्रमुख पद को लेकर अंतिम तस्वीर चुनाव परिणाम और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों के बाद ही स्पष्ट होगी। चार वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला जिला परिषद चुनाव में कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण चर्चा में हैं। वार्ड 6: भाजपा की अनामिका पूनिया के सामने कांग्रेस की सुशीला सीगड़ा हैं। यहां पहली बार जिला परिषद चुनाव लड़ रही प्रत्याशी और अनुभवी पूर्व प्रधान के बीच मुकाबला है। वार्ड 20: भाजपा की निकिता के सामने कांग्रेस की रंजना कुमारी धींवा हैं। दोनों प्रत्याशियों की राजनीतिक परिवारों से निकटता भी चर्चा में है। वार्ड 39: भाजपा की नेहा पूनिया और कांग्रेस की विनीता रणवां के बीच मुकाबला है। वार्ड 41: भाजपा के बनवारीलाल सैनी के सामने कांग्रेस के खलील बुडाना हैं। इस वार्ड में दोनों दलों के संगठनात्मक प्रभाव और स्थानीय समर्थन की परीक्षा होगी। भाजपा और कांग्रेस, दोनों के सामने चुनौती भाजपा के सामने अपने संगठनात्मक प्रभाव को बरकरार रखने के साथ राजनीतिक परिवारों से जुड़े प्रत्याशियों के लिए समर्थन जुटाने की चुनौती है। हर्षिनी कुलहरी के जिला प्रमुख और जिलाध्यक्ष के रूप में अनुभव के साथ अनामिका पूनिया और दीक्षा अहलावत जैसे प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। वहीं, कांग्रेस के लिए वार्ड 6 में सुशीला सीगड़ा की उम्मीदवारी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा रंजना कुमारी धींवा, विनीता रणवां और खलील बुडाना के परिणाम भी स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति का संकेत देंगे। कांग्रेस के सामने इन प्रत्याशियों को संगठनात्मक समर्थन और स्थानीय मतदाताओं के भरोसे के साथ चुनावी सफलता में बदलने की चुनौती है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों के सामने चुनौती भाजपा के सामने अपने संगठनात्मक प्रभाव को बरकरार रखने के साथ राजनीतिक परिवारों से जुड़े प्रत्याशियों को जीत दिलाने की चुनौती है। हर्षिनी कुलहरी के जिला प्रमुख और जिलाध्यक्ष के रूप में अनुभव को इस चुनाव में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं अनामिका पूनिया और दीक्षा अहलावत जैसे प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। कांग्रेस के लिए सुशीला सीगड़ा की उम्मीदवारी वार्ड 6 में महत्वपूर्ण है। इसके अलावा रंजना कुमारी धींवा, विनीता रणवां और खलील बुडाना जैसे प्रत्याशियों के परिणाम भी स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति का संकेत देंगे। कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह इन चेहरों को संगठनात्मक समर्थन और स्थानीय मतदाताओं के भरोसे में कितना बदल पाती है।