देश की हाई सिक्योरिटी जेलों में शुमार जोधपुर सेंट्रल जेल खुद की सुरक्षा नहीं कर पा रही। यहां करीब 2 हजार बंदी हैं। इनमें बड़े गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर, हार्डकोर, हत्यारे, तस्कर के साथ कई बार आतंकी भी शामिल होते हैं। इसके बावजूद यहां जेल प्रहरी के 75 पद खाली हैं। स्वीकृत 180 में से 105 प्रहरी ही तैनात हैं। इनमें से भी निगरानी का जिम्मा केवल 70-80 प्रहरियों पर है। बाकी ऑफिस, मेन गेट की सुरक्षा व मुलाकात व्यवस्था जैसे कार्यों में लगे हैं। प्रहरियों की कमी के कारण जेल की सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ चुकी है। यहां आए दिन बंदियों से मोबाइल मिल रहे हैं। पिछले 11 माह में 21 मोबाइल और 14 सिम मिल चुकी हैं। कई बार तंबाकू उत्पाद और नशे की सामग्री भी मिल जाती है। मोबाइल जैसे प्रतिबंधित सामान न केवल जेल में आसानी से पहुंच रहे हैं, बल्कि कई बंदी इनका बेखौफ इस्तेमाल भी कर रहे हैं। मंगलवार को एक बंदी बाथरूम में मोबाइल पर बात कर रहा था। तलाशी ले रहे प्रहरी ने उसे पकड़ लिया। इसके अलावा बंदियों में आपसी झगड़े भी बढ़ रहे हैं। स्टाफ की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई बार एक संतरी को दो बैरकों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। 14 वार्डों के अलग-अलग बैरकों में 80 से 250 तक बंदी हैं। इतनी बड़ी संख्या में बंदियों पर हर समय नजर रखना एक कर्मचारी के लिए आसान नहीं है। इसी का फायदा उठाकर बंदी आसानी से प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग कर लेते हैं। तंबाकू उत्पाद और नशे की सामग्री भी कई बार जब्त जेल में प्रहरी कम होने से बंदियों को संभालना भी मुश्किल हो रहा है। चार महीनों में मारपीट व हमलों की चार वारदातें हो चुकी हैं। मामूली विवाद में बंदी झगड़ पड़ते हैं। उन्हें काबू करना मुश्किल हो जाता है।
अप्रैल में बंदी सुरेंद्र सिंह और गोविंद सिंह के बीच मारपीट हुई। दोनों घायल हो गए। 3 जून को बंदी रमेश से सीताराम, रामप्रकाश और श्यामलाल ने बैरक में मारपीट की। 8 जुलाई को बंदी विश्वास तेजी पर ब्लेड से हमला हो गया। उसके सिर में 5 टांके आए। 30 जुलाई को मटकी से पानी भरने को लेकर विवाद हो गया। इसमें इमरान समेत तीन बंदियों ने रावलराम उर्फ राहुल से मारपीट की। मोबाइल की तलाश में 8-10 प्रहरी लगाए: जेल प्रहरियों को निगरानी के अलावा तलाशी, सुरक्षा गार्ड, बीमार बंदियों को अस्पताल पहुंचाने सहित अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है। जेलर के साथ 8 से 10 प्रहरियों को तो केवल मोबाइल व अन्य प्रतिबंधित सामग्री की तलाशी में लगा रखा है। यह टीम अलग-अलग समय पर जेल में तलाशी लेती है। जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह ने बताया कि नई भर्ती में मिले 39 प्रहरी आने के बाद व्यवस्थाओं में काफी हद तक सुधार हो जाएगा। वार्ड 4 से 7 व 11 में गैंगस्टर भी बंद: जेल के वार्ड नंबर 4, 6, 7 और 11 की बैरकों में गैंगस्टर, हार्डकोर व आदतन अपराधियों के साथ मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपी भी बंद हैं। इन कैदियों की निगरानी जेल प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है। खासकर स्टाफ की कमी के बीच इन वार्डों की सुरक्षा और बंदियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है। विवाद की स्थिति में कम संख्या में मौजूद जेल प्रहरियों के लिए हालात को तुरंत नियंत्रित करना अतिरिक्त चुनौती बन जाता है।
39 प्रहरी 6 माह बाद जॉइनिंग देंगे: हाल में प्रदेश में 968 जेल प्रहरियों की भर्ती हुई है। इनमें से जोधपुर जेल को 44 प्रहरी मिले। पांच 5 ने त्यागपत्र दे दिया। वे दूसरी भर्ती में पास हो गए थे। इस कारण जोधपुर के खाते में 39 प्रहरी ही रह गए। इन प्रहरियों को 6 माह की ट्रेनिंग पर भेजा जाएगा। इसके बाद ही जॉइनिंग होगी। बताया जा रहा है कि इन 39 में से भी कुछ प्रहरी ऐसे हैं, जो दूसरी भर्तियों में चयनित हो चुके हैं। वे भी जा सकते हैं।