जोधपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए शनिवार को नामांकन हुए। भाजपा और कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों में इस पद के लिए सीधी टक्कर होगी। कोई निर्दलीय या फिर तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं है। भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को अपना मेयर का प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबी और यूआईटी-जेडीए के चेयरमैन रहे राजेंद्र सोलंकी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के एनवक्त पर राजेंद्र सोलंकी के नाम का पत्ता खोल सभी को चौंका दिया है। नामांकन से ढाई घंटे पहले राजेंद्र सोलंकी के नाम का फैसला लिया गया। इधर, भाजपा की वोटिंग से पहले ही सिंगल नाम पर यानी प्रसन्न चंद मेहता के नाम पर सहमति थी। दोनों दलों की ओर से दावा किया जा रहा है कि पार्षदों की भी इसमें सहमति ली गई थी। सूत्रों की माने तो कांग्रेस से जीते बागी, जो भाजपा में गए हैं। उन्हें तोड़ने के लिए पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबी राजेंद्र सोलंकी की एंट्री हुई है। पढ़िए मेयर दावेदारों की इनसाइड स्टोरी… भाजपा ने तीन तो कांग्रेस ने चार प्रत्याशियों के नामांकन का खेला दांव शनिवार सुबह नामांकन का समय शुरू होने से पहले ये माना जा रहा था कि भाजपा तीन प्रत्याशियों के नामांकन करवाएगी। इसके बाद 22 को नाम वापसी के दिन किसी एक नाम पर सहमति बनेगी। इधर, कांग्रेस ने इसी के अनुसार अपनी प्लानिंग की थी। कांग्रेस के नेता करण सिंह उचियारड़ा, राजेंद्र सोलंकी और पूर्व विधायक मनीषा पंवार जब निगम पहुंचे तो उन्होंने भी दावा किया कि वे चार नॉमिनेशन करेंगे। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस ने गणपत सिंह चौहान के नाम से फॉर्म लिया गया था। वहीं, नरेश जोशी और प्रदीप गांग का भी नाम था। इनमें चौथा नाम राजेंद्र सोलंकी का था। इसके बाद जब ये क्लियर हुआ कि भाजपा सिंगल नाम का नॉमिनेशन करेगी तो कांग्रेस ने भी अपनी प्लानिंग को बदलना शुरू किया। एक नाम पर आकर अटका पेंच, पूर्व सीएम और हाईकमान के आदेश पर राजेंद्र सोलंकी की हुई एंट्री कांग्रेस में कशमकश चलती रही कि किसी एक नाम को फाइनल करना है। सहमति राजेंद्र सोलंकी की थी लेकिन, सिंबल के लिए मामला एक बा​र फिर अटक गया। इस बीच राजेंद्र सोलंकी ने इससे दूरी बना ली। वे निगम से निकल गए। सूत्रों के अनुसार, इस बीच पूर्व सीएम अशोक गहलोत और हाईकमान से बातचीत का दौर शुरू हुआ। चार दावेदार में से एक पर सहमति बनानी थी। हाईकमान और पूर्व सीएम अशोक गहलोत के आदेश के बाद राजेंद्र सोलंकी को तैयार किया गया। लेकिन सिंबल को लेकर मामला अटका रहा। शनिवार दोपहर 12:30 बजे तय हुआ कि राजेंद्र सोलंकी ही उम्मीदवार होंगे। दो बजे के करीब राजेंद्र सोलंकी दोबारा निगम लौटे। उन्हें ढोल-थाली के साथ लाया गया और सभी को मैसेज दिया गया कि राजेंद्र सोलंकी ही कांग्रेस की तरफ से मेयर पद के दावेदार होंगे। आखिरी में क्यों उतारा राजेंद्र सोलंकी को ? दरअसल, राजेंद्र सोलंकी पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबियों में से एक माने जाते हैं। सोलंकी पूर्व जेडीए और यूआईटी चेयरमैन भी रह चुके हैं। इसके अलावा गहलोत सरकार में राज्यमंत्री का भी दर्जा मिला था। वहीं, स्थानीय संगठन की बात करे तो सभी पार्षद सोलंकी के नाम पर सहमत थे। शुक्रवार को भी पार्षदों की जब सहमति ली गई तो सोलंकी के नाम पर राजी भी थे। भाजपा को समर्थन करने वाले सात निर्दलीय पार्षदों में तीन कांग्रेस के भी हैं। इनमें दो माली समुदाय से भी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि सोलंकी मेयर बनते हैं तो भाजपा को समर्थन देने वाले कांग्रेस समर्थित निर्दलीय और ओबीसी पार्षद भी उनके पक्ष में वोट करेंगे। ऐसे में कांग्रेस डैमेज कंट्रोल करने में सफल हो जाएगी। जयपुर से बुलवाकर प्रसन्नचंद मेहता को चुनाव लड़वाया भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को मेयर का प्रत्याशी बनाया है। इन​ निकाय चुनावों में मेहता समेत भाजपा के सीनियर नेताओं को अलग-अलग शहरों के निकाय चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें प्रसन्नचंद मेहता को जयपुर निकाय चुनाव का प्रभारी बनाया गया। लेकिन, इन निकाय चुनाव में पार्षद का टिकट देने के लिए मेहता को दोबारा जयपुर से जोधपुर बुलाया और चुनावी मैदान में उतारा। इधर, ये तय था कि मेहता यदि चुनाव ​जीतते हैं तो मेयर पद के वे ही दावेदार होंगे। ये मैसेज संगठन ने पहले ही पदाधिकारियों और प्रत्याशियों को क्लियर कर दिया था। पार्षदों से दो घंटे राय, पैनल के नाम में भी प्रसन्नचंद मेहता का नाम सबसे ऊपर था मेयर पद के दावेदारों में प्रसन्नचंद मेहता के अलावा मेघराज लोहिया और कमलेश पुरोहित का भी था। इससे पहले गुरुवार को बाड़ेबंदी में दो घंटे तक पार्षदों के साथ बैठक हुई। इन बैठक में सभी से वन टू वन चर्चा की गई और राय ली गई। इसी बैठक में प्रसन्नचंद मेहता के नाम को लेकर जब चर्चा हुई तो सहमति बनती भी नजर आई। संगठन के अनुसार चार नामों का पैनल भेजना था। पैनल में चार नाम थे और इन नामों में प्रसन्नचंद मेहता का नाम सबसे ऊपर रहा। आखिर में क्यों किया गया प्रसन्नचंद मेहता का नाम ? बताया जा रहा है कि प्रसन्नचंद मेहता जीते हुए पार्षदों में से सबसे पुराने और संघिष्ठ कार्यकर्ता के तौर पर उनकी पहचान है। 49 साल उन्होंने पार्टी और संगठन को दिए। इसके अलावा संघ के भी काफी करीबी है। सबसे बड़ी बात इनके नाम पर न तो संगठन के अंदर और न ही बाहर ​किसी तरह का असंतोष सामने नहीं आया। ये भी पढ़ें… जोधपुर मेयर के लिए बीजेपी के प्रसन्नचंद मेहता कैंडिडेट:कांग्रेस से राजेंद्र सोलंकी होंगे मेयर उम्मीदवार; पार्षद का नहीं लड़ा था चुनाव