जोधपुर में भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता (69) और कांग्रेस से राजेंद्र सोलंकी (71) की मेयर पद के लिए सीधी टक्कर है। इन दोनों मेयर के प्रत्याशियों की राजनीतिक यात्रा में भी एक समानता है। दोनों ने ही छात्र राजनीति से शुरुआत की है। भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता के राजनीति जीवन की शुरुआत एबीवीपी से हुई थी। इसके बाद वे भाजयुमो के पहले जिलाध्यक्ष बने। वहीं, राजेंद्र सोलंकी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की थी। मेहता संघ के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग चुनावों में उन्होंने शहर और संभाग की कमान संभाली है। वहीं, राजेंद्र सोलंकी जोधपुर में पानी संकट को लेकर हुए जन आंदोलन की अगवानी की थी और 8 दिन तक जेल में रहे थे। प्रसन्नचंद मेहता पहली बार पार्षद बनकर वार्ड नंबर 82 से जीत हासिल की है। वहीं, सोलंकी को हाइब्रिड मॉडल के तहत सीधे मेयर पद के लिए उतारा गया है। वे पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबियों में माने जाते हैं। इन निकाय चुनावों में भाजपा को 45 और कांग्रेस को 44 पार्षद मिले हैं। पार्षदों के बाद अब मेयर चुनाव के लिए भी भाजपा-कांग्रेस में बराबर की टक्कर है। पढि़ए दोनों प्रत्याशियों के राजनीतिक जीवन की प्रोफाइल… साल 1977 से एबीवीपी से शुरुआत, संघ में कार्यकर्ता रहे प्रसन्नचंद मेहता पिछले 49 साल से संगठन से जुड़े हुए हैं। संघ में वे स्वयं सेवक और कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय रहे हैं। इससे पहले साल 1977 में उन्होंने एबीवीपी से शुरुआत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में वे सक्रिय भूमिका में रहे। यहीं से उनकी संघ और संगठन में भागीदारी बढ़ती गई। जब भारतीय जनता युवा मोर्चा की शुरुआत की तो प्रसन्नचंद मेहता भी जुड़ गए। इस दौरान वे जोधपुर भाजयुमो के पहले जिलाध्यक्ष बने और इसी के साथ सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री हुई। जोधपुर के युवओं को भाजयुमो से जोड़ने का काम किया। घर-घर जाकर संगठन को लेकर चर्चा की। इसके साथ ही बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ा। इस भागीदारी को देखते हुए 90 के दशक में उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद भी रहे, कई शहरों में संभाल चुके चुनावी कमान प्रसन्नचंद मेहता भाजपा जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। जब सतीश पूनिया प्रदेशाध्यक्ष थे, जब मेहता प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रहे। वे पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के करीबी माने जाते हैं। संघ में सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर लगातार वे सक्रिय रहे, इसी का नतीजा है कि वे संघ के भी करीबी है। संगठन से लेकर पार्टी तक के पदाधिकारियों की वे पहली पसंद बने। इसके अलावा विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों में भी वे कई शहरों के प्रभारी रहे और चुनावी कमान को संभाला। कांग्रेस के सोलंकी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में हुई कांग्रेस के मेयर कैंडिडेट राजेंद्र सिंह सोलंकी की राजनीतिक यात्रा 1970 के दशक में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई थी। वे 1975 में जोधपुर युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद 1982 में पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत ​हासिल की। 1993 के विधानसभा चुनाव में सरदारपुरा विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी ने उन्हें हराया। सोलंकी अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबियों में शुमार रहे हैं। पानी संकट के लिए हुए आंदोलन की अगवानी की, 8 दिन जेल में रहे साल 1993 में जोधपुर में पानी संकट को लेकर कांग्रेस की तरफ से जन आंदोलन चलाया गया था। इसमें राजेंद्र सिंह सोलंकी कांग्रेस नेता जुगल काबरा के साथ जेल गए और 8 दिन जेल में रहे। इसके बाद जब 1998 में कांग्रेस सरकार बनी तो अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। साल 2002 में सोलंकी को जोधपुर नगर विकास न्यास (यूआईटी) का चेयरमैन बनाया गया। गहलोत सरकार के दूसरे कार्यकाल में वे 2011 में जोधपुर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन बनाए गए। सोलंकी 2014 में एक बार फिर निगम चुनाव मैदान में उतरे और पार्षद बने। इसके बाद वे नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चुने गए। साल 2018 में राजस्थान में हुए विद्यानसभा चुनाव में कांग्रेस विजयी हुई। अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। फिर साल 2022 में सोलंकी को पशुधन विकास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया। इस बार निगम चुनाव उन्होंने सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में चुनवा अभियान की जिम्मेदारी संभाली। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में संभाली चुनावी अभियान की जिम्मेदारी राजेंद्र सोलंकी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में चुनाव अभियान की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। वे जोधपुर लोकसभा चुनाव में 1989,1991,1996 और 1996 मुख्य चुनवा प्रभारी रहे। इसके अलावा वे अलग-अलग 12 सामाजिक संगठनों में संरक्षक, सदस्य और अध्यक्ष पदों पर भी रह चुके हैं। इसके साथ ही 2018 और 2023 के विधानसभा चुनाव में सरदारपुरा विधानसभा में चुनाव अभियान की जिम्मेदारी संभाली।