जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों पर वोटिंग पूरी हो चुकी है। जोधपुर निगम में हुए चार चुनाव की वोटिंग का रिकॉर्ड टूटा है। साल 2004 से लेकर 2020 तक हुए निकाय चुनाव के बाद पहली बार है, जब मतदान प्रतिशत 71.10 प्रतिशत तक पहुंचा है। वहीं प्रत्याशियों का सियासी भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है। अब 14 सितंबर को स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि कौनसे वार्ड में किस प्रत्याशी की जीत होगी। जोधपुर में 2004 से लेकर अब तक हुई वोटिंग वोटिंग प्रतिशत ने भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों में बढ़ाई हलचल दरअसल, इस बार वोटिंग प्रतिशत बढ़ने का सबसे बड़े दो कारण रहे हैं। पहला परिसीमन और दूसरा नए वार्ड। परिसीमन में ग्रामीण क्षेत्रों के भी कई वार्डों को शामिल किया गया। ऐसे में इन वोटिंग प्रतिशत को लेकर माना जा रहा है कि इस बार के बोर्ड में निर्दलीयों की भी भूमिका रहेगी। इससे पहले जोधपुर में दो नगर निगम थे। इनमें उत्तर में 62.64 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जबकि दक्षिण में 58.76 प्रतिशत हुई थी। ऐसे में एक मेयर बीजेपी का था और एक कांग्रेस का। जोधपुर नगर निगम के चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के दो बड़े नेताओं की चर्चा काफी रही। इनमें एक केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तो दूसरे पूर्व सीएम अशोक गहलोत रहे। 2004 में सबसे कम रहा था वोटिंग प्रतिशत साल 2004 से लेकर अब तक हुए निकाय चुनाव को देखें तो साल 2004 में सबसे कम 49.64 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इसके बाद साल 2009 में 58.53 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद साल 2014 में जब मोदी लहर थी, तब वोटिंग प्रतिशत 63 प्रतिशत तक रहा था। वहीं साल 2020 के चुनाव में वोटिंग प्रतिशत गिर गया था। हालांकि उस समय दो नगर निगम थे, लेकिन दोनों में साल 2014 की तुलना में मतदान प्रतिशत कम ही रहा था। सुबह और शाम में हुई सबसे ज्यादा वोटिंग जोधपुर नगर निगम के सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक का वोटिंग ट्रेंड देखें तो सुबह और शाम में सबसे ज्यादा वोट पड़े। सुबह 10 बजे तक 19.97% और दोपहर 1 बजे तक 43.51 प्रतिशत तक वोटिंग हुई। इस दौरान वोटिंग प्रतिशत 23 प्रतिशत तक बढ़ा। दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक वोटिंग महज 12.19 प्रतिशत तक ही बढ़ी। इसके बाद दोपहर 3 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक वोटिंग प्रतिशत 14.68 प्रतिशत तक बढ़ा। निर्दलीयों की भूमिका रहेगी, दोनों दलों को लेना पड़ सकता है सहारा हालांकि बोर्ड किसका बनेगा और कौन मेयर बनेगा, इसमें समय है। जिस हिसाब से शहर में वोटिंग हुई है, उसके अनुसार इस बार निर्दलीयों की भूमिका काफी रहेगी। इधर, दोनों दलों ने वोटिंग के बाद प्रत्याशियों और फील्ड पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि दोनों दलों की नजर जिताऊ निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी है। ऐसे में यदि जरूरत पड़ी तो दोनों दल निर्दलीय प्रत्याशियों को भी बाड़ेबंदी में ले सकती है। इस बार दोनों के सामने चुनौती जोधपुर नगर निगम में साल 2004 से लेकर साल 2020 तक जोधपुर में तीन बार कांग्रेस और दो बार भाजपा के मेयर रहे। 2004 और 2009 में कांग्रेस का बोर्ड बना था। साल 2015 में भाजपा का बोर्ड बना था। इसके बाद गहलोत सरकार में साल 2020 में नगर निगम को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। इसमें उत्तर नगर निगम की मेयर कुंती देवड़ा बनी थीं, जबकि दक्षिण की मेयर विनिता सेठ बनी थीं। इस ट्रेंड को देखा जाए तो इस बार भी दोनों पार्टियों के लिए मेयर बनाना इतना आसान नहीं है। हालांकि दोनों ही दल पूर्ण बहुमत का दावा कर रहे हैं, लेकिन वोटिंग के अनुसार इस बार भी ट्रेंड बदलता हुआ नजर आ रहा है। दोनों पार्टियों के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर, पूर्व डिप्टी मेयर से लेकर जिलाध्यक्ष तक दौड़ में इन निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा शहर के मेयर को लेकर चर्चा हो रही है। इस बार मेयर के लिए अनारक्षित सीट रिजर्व हुई है। कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के मेयर पद के दावेदार आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें वार्ड नंबर 42 से भाजपा के देवेंद्र सालेचा का मुकाबला कांग्रेस के नरेशचंद्र जोशी से हुआ है। वहीं 40 नंबर वार्ड से भाजपा के प्रत्याशी पूर्व राज्यमंत्री मेघराज लोहिया और कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष ओमकार वर्मा चुनावी मैदान में हैं। इधर, वार्ड नंबर 25 से पूर्व न्यासी और भाजपा प्रत्याशी कमलेश पुरोहित भी मैदान में हैं। उनके सामने जेन-जी प्रत्याशी और कांग्रेस नेता का बेटा आनंद राठी हैं। वहीं कांग्रेस में मेयर पद के दावेदार में प्रदीप गांग भी चुनावी मैदान में है। उनके सामने जोधपुर के सर्जन डॉक्टर रामगोयल की बेटी डॉ. सुगंधा गोयल को बीजेपी ने उतारा है। ये खबर भी पढ़ें… बोलेरो कैंपर से स्टंट करने पर तोड़े कांच:पूर्व सीएम के पैर छूने पर विवाद; आमने-सामने हुए समर्थक, बुजुर्गों को गोद में उठाया; 71.10 प्रतिशत वोटिंग जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में पार्षदों के लिए शुक्रवार को मतदान पूरा हुआ। शाम 6 बजे तक रिकॉर्ड 71.10 प्रतिशत वोटिंग रिकॉर्ड की गई। पाल बालाजी एरिया में बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से बोलेरो कैंपर में स्टंट करने पर कांग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। वे पत्थर और लाठी लेकर पीछे दौड़े। (यहां पढ़ें पूरी खबर)