जोधपुर में मेयर पद के नामांकन को लेकर आज आखिरी दिन है। नगर निगम में दोपहर 3 बजे तक नामांकन पेश किए जाएंगे। हालांकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने दावेदारों की घोषणा नहीं की है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से गणपत सिंह चौहान और नरेश जोशी मेयर पद के लिए दावेदारी पेश कर सकते हैं। कांग्रेस से मेयर पद की रेस में प्रदीप गांग का भी नाम शामिल है। इनमें हाइब्रिड उम्मीदवार के तौर पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबी राजेंद्र सोलंकी का भी नाम सामने आ रहा है। वहीं भाजपा में मेघराज लोहिया और प्रसन्न चंद मेहता का में से किसी एक नाम पर सहमति बनने की चर्चा है। हालांकि दोनों दलों की ओर से अभी उम्मीदवारों के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि किस पार्टी से कौन दावेदारी पेश करेगा ये स्थिति शनिवार को साफ हो जाएगी। इसके साथ ही कमलेश पुरोहित भी मेयर पद के दावेदारों में शामिल है। यदि ऐसे में एक नाम पर सहमति नहीं बन पाती है तो पार्टी नया चेहरा भी मैदान में उतार सकती है। इसमें विजय पंवार का नाम भी बताया जा रहा है। कांग्रेस से एक और प्रत्याशी जता सकता है दावेदारी कांग्रेस के कुल तीन प्रत्याशियों ने नामांकन फॉर्म लिया है। इनमें एक वार्ड 51 से सरस्वती प्रजापत के परिवार की ओर से नामांकन फॉर्म लिया गया है। शुक्रवार को नामांकन फॉर्म लेने आए परिवार के सदस्य ने बताया कि सरस्वती प्रजापत या फिर उनके पिता दावेदारी कर सकते है। कांग्रेस से संभावित दावेदार नरेश जोशी क्यों: जोधपुर में ब्राह्मण समाज के प्रमुख चेहरे और पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष रह चुके जोशी ने वार्ड 40 से भाजपा के पूर्व उप-महापौर देवेंद्र सालेचा को 299 वोटों से शिकस्त दी है। अशोक गहलोत के शासनकाल में संगठन चलाने का उनका अनुभव काफी काम आ सकता है। गणपत सिंह चौहान क्यों: पूर्व में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके गणपत सिंह के पास निगम की अंदरूनी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक कामकाज का लंबा अनुभव है, जो उनका सबसे बड़ा मजबूत पक्ष है। प्रदीप गांग क्यों: प्रदीप गांग ओसवाल जैन समाज से ताल्लुक रखते हैं, जिसका जोधपुर की शहरी राजनीति और व्यापारिक तबके पर गहरा प्रभाव है। भाजपा के संभावित दावेदार मेघराज लोहिया क्यों: वरिष्ठ भाजपा नेता मेघराज लोहिया ने वार्ड संख्या 42 से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ओंकार वर्मा को 279 वोटों से हराकर अपनी ताकत का अहसास कराया है। पूर्व में राजसिको के चेयरमैन रह चुके लोहिया का दावा भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति में सबसे मजबूत माना जा रहा है। वे पार्टी के बेहद वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेहद करीबी माने जाते हैं। प्रसन्नचंद मेहता क्यों: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रसन्नचंद मेहता संगठन के पुराने सिपाही हैं और भाजपा में जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के भी नजदीकी है। कमलेश पुरोहित क्यों: महापौर की रेस में तीसरा बड़ा नाम कमलेश पुरोहित का है। कमलेश नगर सुधार न्यास में न्यासी के रूप में पहले काम कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा होने के कारण भी पार्टी आलाकमान उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर सकता है।