जोधपुर में बीजेपी ने मेयर पद पर प्रसन्नचंद मेहता का नाम घोषित किया है। वहीं कांग्रेस से राजेंद्र सोलंकी मेयर उम्मीदवार होंगे। सोलंकी ने पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था। बीजेपी कैंडिडेट मेहता ने दोपहर करीब डेढ़ बजे नगर निगम पहुंचकर नामांकन दाखिल कर दिया। नोमिनेशन करते समय उनके साथ संभाग प्रभारी भूपेंद्र सैनी, जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल, शहर विधायक अतुल भंसाली, सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी सहित पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं कांग्रेस ने (हाइब्रिड) गैर पार्षद राजेंद्र सोलंकी को मेयर पद पर उम्मीदवार बनाया है। सोलंकी ने दोपहर करीब सवा दो बजे नॉमिनेशन दाखिल किया। सोलंकी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी हैं। उन्होंने निगम चुनाव में पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था। बता दें कि राजस्थान में 2019 से पहले गैर पार्षद निकाय प्रमुख का चुनाव नहीं लड़ सकते थे। मेयर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव केवल पार्षद ही लड़ सकते थे। कांग्रेस राज में पुराने नियमों को बदलकर इसका प्रावधान किया गया था। कांग्रेस सरकार के समय 2019 में राजस्थान नगर पालिका निर्वाचन नियम 1994 में बदलाव कर गैर पार्षद के भी निकाय प्रमुख बनने का प्रावधान लागू किया था। इसे हाइब्रिड फॉर्मूले का नाम दिया गया था। कांग्रेस राज में लागू हुआ यह प्रावधान अब भी बरकरार है। पढ़ें मेयर चुनावों में पूरे दिनभर का अपडेट… मेहता का नाम फाइनल होने के बाद पहुंचे प्रतिनिधि: निकाय चुनाव प्रभारी भूपेंद्र सैनी ने प्रसन्नचंद मेहता के नाम की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने मेहता के तिलक लगाया और फिर वे जोधपुर के लिए रवाना हुए। इधर, नाम की घोषणा होते ही मेहता के प्रतिनिधि निगम ऑफिस पहुंचे और नॉमिनेशन की फीस जमा करवाई। कांग्रेस के पदाधिकारी पहुंचे और चार प्रत्याशियों के नामांकन की घोषणा: इस बीच 12 बजे के करीब कांग्रेस के पदाधिकारी पहुंचे। राजेंद्र सोलंकी के साथ करण सिंह उचियारड़ा और पूर्व विधायक मनीषा पंवार के साथ नरेश जोशी, प्रदीप गांग और गणपत सिंह थे। इससे पहले गणपत सिंह के प्रतिनिधि निगम आए और दावा किया कि 1 बजे वे नामांकन करेंगे।
इधर, कुछ देर बाद ही कांग्रेस के पदाधिकारी निगम पहुंचे और कहा कि कांग्रेस एक नहीं बल्कि चार प्रत्याशियों के नामांकन करवाएगी। इसके बाद पार्टी जिस नाम पर सहमति देगी, वह फाइनल उम्मीदवार होगा। नरेश जोशी इंतजार करते रहे, कुछ देर बाद आया बुलावा: सभी कांग्रेस पदाधिकारी निगम के थर्ड फ्लोर पर पहुंचे। अचानक प्रोग्राम बदला और रिटर्निंग ऑफिस के सामने बने एक कमरे में पहुंचे। लेकिन, इससे पहले नरेश जोशी 307 नंबर कमरे में आ गए थे, जहां रिटर्निंग अधिकारी बैठे थे। कुछ देर तक वे इंतजार करते रहे इसके बाद उन्हें पदाधिकारियों ने बुलावा भेजा। नॉमिनेशन से पहले देव दर्शन करने पहुंचे मेहता: मेहता पार्टी पदाधिकारियों के साथ दोपहर करीब 12:15 बजे जोधपुर पहुंचे। नॉमिनेशन से पहले वे पाल बालाजी मंदिर पहुंचे। इसके बाद वे जब्बर नाथ महादेव मंदिर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना करने के बाद वे नॉमिनेशन करने के लिए आए। कांग्रेस की मीटिंग से निकले सोलंकी, एक घंटे बाद लौटे: इधर, कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदली और सिंगल फॉर्म जमा कराने पर विचार किया। लेकिन, राजेंद्र सोलंकी वहां से निकल गए। एक घंटे बाद जब वे लौटे तो उन्हें ढोल-थाली के साथ नगर निगम तक लाया गया।
संघ से जुड़े रहे हैं प्रसन्नचंद मेहता, सोलंकी पूर्व सीएम के करीबी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रसन्नचंद मेहता संगठन के पुराने सिपाही हैं और भाजपा में जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के भी नजदीकी है। उन्होंने वार्ड 82 से कांग्रेस के कैंडिडेट अरविंद परिहार को हराकर जीत दर्ज की है। वहीं राजेंद्र सोलंकी पूर्व सीएम अशोक गहलोत के करीबी है। वे जेडीए और यूआईटी चेयरमैन भी रह चुके हैं। युवा कांग्रेस से उनकी राजनीति में एंट्री हुई थी। वे पार्षद भी रह चुके हैं। गहलोत सरकार के समय उन्हें राज्यमंत्री का भी दर्जा मिला था। इसके अलावा शहर के अलग-अलग 12 सामाजिक संगठनों में वे संरक्षक, अध्यक्ष और सदस्य रह चुके हैं।
100 वार्डों वाले जोधपुर निगम में BJP और कांग्रेस दोनों पार्टियां 45-44 सीटों पर सिमट गई थी। जबकि बहुमत के लिए 52 पार्षदों की जरूरत है। वहीं 10 सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी। इसके अलावा 1 सीट आरएलपी के खाते में गई है। प्रदेश में सत्ता होने के कारण भाजपा के पास बोर्ड बनाने का एडवांटेज है। हालांकि कांग्रेस भी निर्दलीयों को साधकर सियासी गुणा-भाग में जुटी है। दोनों ही खेमों में महापौर की कुर्सी को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। (पूरी खबर पढ़ें)