‘ जब विवादों का अंत आपसी समझौते से हो, तो किसी की हार नहीं होती, बल्कि न्याय की जीत होती है।’ लोक अदालत इसी भावना को दर्शाती है। चीफ जस्टिस ने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए यह संदेश दिया। उन्होंने समझौते के जरिए विवादों के निपटारे के महत्व को रेखांकित किया। जोधपुर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ चीफ जस्टिस संजय अग्रवाल ने मां सरस्वती की तस्वीर के सामने दीप जलाकर किया। इस दौरान उन्होंने संबोधित करते हुए कहा- लोक अदालत विवादों के निस्तारण का मात्र एक संस्थागत माध्यम नहीं, बल्कि आमजन तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने का एक संवेदनशील, सार्थक एवं मानवीय प्रयास है। इसका वास्तविक उद्देश्य केवल विवादों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि न्याय की अपेक्षा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में राहत, संतोष और विश्वास का संचार करते हुए उसे एक नई शुरुआत का अवसर प्रदान करना है। कहा-इसके पीछे एक मानवीय संवेदना उन्होंने संबोधित करते हुए कहा- कोई भी प्रकरण न्यायिक अभिलेखों में भले ही महज एक संख्या के रूप में दर्ज हो, लेकिन उसके पीछे एक मानवीय संवेदना, एक अपेक्षा और एक अनकही कहानी होती है- किसी परिवार की सुख-शांति लौटने की आस, किसी व्यक्ति की उचित मुआवजा प्राप्त करने की उम्मीद, वर्षों से पारस्परिक संबंधों को प्रभावित कर रहे किसी विवाद से उपजी पीड़ा, अथवा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष की प्रतीक्षा कर रहे किसी नागरिक की आशा। प्रत्येक प्रकरण केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि किसी के जीवन से जुड़ी ऐसी परिस्थिति है, जिसका समाधान उसे राहत, संतोष और नई शुरुआत का अवसर प्रदान कर सकता है। किसी ने बहुत ही सुंदर कहा है कि ‘‘न्याय में देरी, न्याय से वंचित किए जाने के समान है, और समय पर मिला न्याय ही वास्तविक रूप से अनुभव किया गया न्याय है। चीफ जस्टिस बोले- इस बार और भी बेहतर परिणाम मिलेंगे उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न केवल आशा की नई किरण प्रदान करती है बल्कि जनअपेक्षाओं के अनुरूप भी है। पिछली लोक अदालत की तुलना में इस राष्ट्रीय लोक अदालत से मेरी उम्मीद और अपेक्षाएं अधिक हैं। आज के आयोजन के लिए जिस व्यापक स्तर पर सहभागिता और तैयारियां की गई है, वे ये दर्शाती है कि इस बार और अभी बेहतर परिणाम प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर हैं। इस अवसर पर जस्टिस विनीत कुमार माथुर, प्रशासनिक न्यायाधीश व कार्यकारी अध्यक्ष, राज. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व अरूण मोंगा, न्यायाधिपति एवं अध्यक्ष राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जोधपुर व राज. उच्च न्यायालय के समस्त न्यायाधिपतिगण, रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा समेत हरिओम शर्मा अत्री, सदस्य सचिव राज. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भी मौजूद रहे। जोधपुर में 4 बेंचों का गठन कर अलग-अलग 1543 प्रकरण किए रेफर राजस्थान हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति जोधपुर के सचिव सुमन सहारण ने बताया कि इस लोक अदालत में राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में 4 बेंचों का गठन कर अलग-अलग 1543 प्रकरण रेफर किए गए। इसके तहत बैंच सं. 1 में जस्टिस सुनील बेनीवाल, अध्यक्ष व महावीर बिश्नोई, अतिरिक्त महाधिवक्ता बतौर सदस्य व बैंच संख्या 2 में जस्टिस मुकेश राजपुरोहित, अध्यक्ष व संजय राज पालीवाल, राजकीय अधिवक्ता बतौर सदस्य, बैंच संख्या 3 में जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू, अध्यक्ष व ऋतुराज सिंह भाटी, राजकीय अधिवक्ता, सदस्य और बैंच संख्या 4 में जस्टिस संजीत पुरोहित, अध्यक्ष और मुकेश दवे, अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता ने बतौर सदस्य सुनवाई कर पक्षकारान के मध्य समझाइश करवाकर205 प्रकरणों का निस्तारण कर 7,04,25,860 के अवार्ड पारित किए गए।