कालेसरा गांव से शनिवार देर शाम श्रद्धालुओं का दल सुरसुरा धाम के लिए रवाना हुआ। यह दल वीर तेजाजी महाराज के धाम से अखंड जोत लाने गया है। कालेसरा के प्रतिनिधि रमेश झेलेवाला ने बताया कि श्रद्धालुओं का यह दल रात तक सुरसुरा धाम पहुंचेगा। वहां रात रुकने और तेजाजी महाराज के दर्शन के बाद रविवार सुबह सभी श्रद्धालु अखंड जोत लेंगे। यह पैदल यात्रा रविवार को दिनभर चलकर शाम तक कालेसरा पहुंचेगी। सुरसुरा धाम का इतिहास करीब 1000 साल पुराना है। वीर तेजाजी अपनी पत्नी पेमल को लेने ससुराल पनेर आए थे। उसी दौरान लाछा गुजरी की गायों को लुटेरे ले गए थे। गायों की रक्षा के लिए जाते समय तेजाजी ने आग में जलते नाग देवता की जान बचाई थी। नाग देवता ने तेजाजी को काटने की कोशिश की। तब तेजाजी ने कहा कि 'लाछा की गायों को छुड़ाकर वापस आऊंगा, तब डंस लेना।' लुटेरों से युद्ध के बाद तेजाजी नाग के बिल के पास पहुंचे। शरीर पर कोई साफ जगह न मिलने पर उन्होंने अपनी जीभ आगे कर दी। यहीं नाग ने उन्हें काटा था और यहीं उनकी पत्नी पेमल सती हुई थी। भक्तों पर फूल बरसाए जाएंगे। जोत को ढोल-बाजे के साथ गांव के मुख्य रास्तों से होते हुए मंदिर तक लाया जाएगा।