करौली जिला जेल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह के तहत स्टाफ और बंदियों को 'मन दर्पण' मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में तनाव, अवसाद, एंग्जायटी, मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम का मकसद तनाव के लक्षणों को पहचानना, समय पर मदद देना और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह मनाया जा रहा है। इसके तहत जिले के अलग-अलग संस्थानों में 'मन दर्पण' के पांच मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला जेल प्रभारी उपाधीक्षक रामकिशन ने बताया कि जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई के सहयोग से जेल स्टाफ को काम की जगह पर तनाव से निपटने और बंदियों को अच्छी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए ट्रेनिंग दी गई। मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति की शपथ दिलाई प्रशिक्षण में 'युवा मन एवं मानसिक स्वास्थ्य', 'आई सपोर्ट माय फ्रेंड्स', 'तनाव प्रबंधन', 'काम की जगह पर मानसिक स्वास्थ्य' और आत्महत्या रोकने के लिए 'गेटकीपर' मॉड्यूल की जानकारी दी गई। मानसिक स्वास्थ्य प्रभारी डॉ. प्रेमराज मीना ने कहा कि बंदियों में अपराध दोबारा न हो और वे स्वस्थ जीवन जी सकें, इसके लिए सकारात्मक सोच, आपसी विश्वास और सहयोग की भावना बहुत जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मानसिक तनाव के संकेत पहचानने, भावनात्मक सहयोग देने और जरूरत पड़ने पर समय पर मदद लेने के लिए जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में सीआरए गौरव शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति की शपथ दिलाई। इस मौके पर वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी अंकुर पाराशर, जेल स्टाफ और बंदी मौजूद रहे।