करौली जिले में इस बार मानसून की रफ्तार पिछले दो साल के मुकाबले धीमी रही है। मानसून का लगभग आखिरी दौर चल रहा है और जिले में अब तक 565.7 एमएम बारिश दर्ज हुई है। यह जिले की औसत 686 एमएम बारिश से 120.3 एमएम कम है। बारिश से बांधों और तालाबों में पानी की आवक तो हुई, लेकिन अब तक सिर्फ कालीसिल बांध ही लबालब होकर छलका है। इसके उलट वर्ष 2024 में करीब 1430.01 एमएम और वर्ष 2025 में 13 अक्टूबर तक 1150.03 एमएम बारिश हुई थी। अच्छी बारिश के कारण दोनों वर्षों में बांधों के कैचमेंट एरिया में पानी की आवक खूब हुई और कई बांध लगातार कई दिनों तक ओवरफ्लो होते रहे। पांचना बांध से भी गंभीर नदी में बड़े पैमाने पर पानी छोड़ा गया। दो साल में बारिश ने बदली थी बांधों की तस्वीर वर्ष 2024 में करौली जिले में झमाझम बारिश का दौर चला था। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष जिले में करीब 1430.01 एमएम बारिश दर्ज हुई थी। बारिश का असर बांधों के कैचमेंट एरिया पर भी पड़ा और पांचना सहित कई बांधों में पानी की अच्छी आवक हुई। वर्ष 2025 में बारिश का आंकड़ा वर्ष 2024 से कम रहा। 13 अक्टूबर तक जिले में करीब 1150.03 एमएम बारिश दर्ज हुई, जो वर्ष 2024 से लगभग 280 एमएम कम थी। इसके बावजूद कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश होने से बांधों और तालाबों में लगातार पानी आता रहा। पहली बार सात बांध एक साथ ओवरफ्लो हुए वर्ष 2025 में जिले के सात बांध पहली बार एक साथ कई दिनों तक ओवरफ्लो होते रहे। जगर बांध, भूमेन्द्र सागर और फतेहसागर बांध पर लंबे समय बाद पानी की चादर चली। इनमें से कुछ बांधों पर करीब दो दशक बाद तो कुछ पर तीन दशक बाद पानी ओवरफ्लो हुआ था। अच्छी बारिश के कारण बांधों के कैचमेंट एरिया में लगातार पानी की आवक बनी रही। यही वजह रही कि मानसून की बारिश का असर केवल बारिश के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बांधों के जलस्तर और पानी की निकासी में भी साफ दिखाई दिया। पांचना से आठ बार खोले गए गेट, 6732 एमसीएफटी पानी छोड़ा जिले के सबसे बड़े पांचना बांध में वर्ष 2025 के पूरे मानसून सीजन में पानी की खूब आवक हुई। बांध की कुल भराव क्षमता 2100 एमसीएफटी है। पानी की आवक बढ़ने पर गंभीर नदी में निकासी के लिए पूरे मानसून सीजन में आठ बार बांध के कभी एक तो कभी चार गेट एक साथ खोलने पड़े। इस दौरान पांचना बांध से कुल 6732 एमसीएफटी पानी गंभीर नदी में छोड़ा गया, जो बांध की कुल भराव क्षमता के तीन गुना से भी अधिक है। पांचना से छोड़ा गया पानी भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान (घना) तक पहुंचा था। 2024 में 19 साल का रिकॉर्ड टूटा था वर्ष 2024 में करौली इलाके में हुई झमाझम बारिश का असर पांचना बांध पर भी दिखाई दिया। उस वर्ष बीते 19 वर्ष की अवधि में पांचना बांध से सर्वाधिक पानी की निकासी हुई थी। पूरे मानसून सीजन में पांचना बांध से 8182 एमसीएफटी पानी गंभीर नदी में छोड़ा गया, जो रिकॉर्ड रहा। बांध से निकले पानी की हिलोरें भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान (घना) तक पहुंची थीं और उद्यान भी पानी से सराबोर हो उठा था। इस बार बांधों में पानी तो आया, लेकिन ओवरफ्लो नहीं इस बार मानसून की स्थिति पिछले दो वर्षों से अलग है। जिले में अब तक 565.7 एमएम बारिश ही हुई है। औसत बारिश 686 एमएम के मुकाबले यह आंकड़ा अभी 120.3 एमएम कम है। पांचना और कालीसिल के अलावा अन्य बांधों में भी पानी की आवक हुई है, लेकिन अभी तक कालीसिल को छोड़कर कोई अन्य बांध ओवरफ्लो नहीं हो सका है। पांचना बांध में कुल गेज 258.62 मीटर के मुकाबले वर्तमान में पानी 258.10 मीटर है। जिले में बारिश का गणित पांचना बांध से मानसून में वर्षवार पानी निकासी इस वर्ष बांधों में पानी की स्थिति