करौली में रक्षाबंधन पर्व पर पतंगबाजी का उत्साह चरम पर है। रियासतकाल से चली आ रही परंपरा के तहत शहर की छतों पर बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग पतंग उड़ाते नजर आ रहे हैं। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों के बीच पतंग काटने की होड़ लगी है और जगह-जगह से ‘वो काटा’ की आवाजें गूंज रही हैं। पर्व को लेकर बाजारों में भी पतंग, मांझे और चरखियों की बिक्री तेज रही। कार्टून कैरेक्टर वाली पतंगों की खास डिमांड इस बार बाजार में पारंपरिक पतंगों के साथ मोटू-पतलू, स्पाइडरमैन और अन्य कार्टून किरदारों वाली पतंगें भी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रही हैं। सामान्य पतंगें 10 से 30 रुपए तक बिकीं, जबकि विशेष डिजाइन वाली पतंगों की कीमत करीब 200 रुपए तक रही। मांझे की रीलें भी गुणवत्ता के अनुसार 150 से 500 रुपए तक में उपलब्ध हैं। पीढ़ियों से पतंग बनाने में जुटे कारीगर करौली में पतंगबाजी की परंपरा के साथ पतंग बनाने का काम भी लंबे समय से चला आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई परिवार पीढ़ियों से पतंग बनाने के कार्य से जुड़े हुए हैं। स्थानीय कारीगरों की बनाई पतंगों के साथ दूसरे शहरों से आने वाली पतंगें भी बाजार में खूब बिक रही हैं। सुबह-शाम पतंग उड़ाने पर रोक पतंगबाजी के उत्साह के बीच प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। चाइनीज मांझे के साथ धातु, नायलॉन और प्लास्टिक से बने मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुबह 6 से 8 बजे और शाम 5 से 7 बजे तक पतंग उड़ाने पर भी रोक लगाई गई है। सड़क और बिजली के तारों से रहें सावधान प्रशासन ने नागरिकों से सुरक्षित मांझे का इस्तेमाल करने की अपील की है। साथ ही पतंग उड़ाते समय सड़क, बिजली के तारों और पक्षियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। इससे त्योहार का उत्साह बरकरार रहने के साथ किसी तरह की दुर्घटना से भी बचा जा सकेगा।