मौसम और सूखे की मार झेल रहे राजस्थान के किसानों के लिए अब राहत भरी खबर आई है। केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के वैज्ञानिकों ने मोठ की 4 नई और उन्नत किस्में तैयार की हैं। ये नई वैरायटी न सिर्फ एक महीने तक बिना बारिश के हरी-भरी रहेंगी, बल्कि प्रति हेक्टेयर पैदावार को 3 से बढ़ाकर सीधे 10 क्विंटल तक पहुंचा देंगी। इन नई किस्मों से तैयार मोठ की फसल को किसान बीज के रूप में अगली बुवाई के लिए भी सुरक्षित रख सकेंगे। इसकी क्वालिटी खराब नहीं होगी। काजरी के डायरेक्टर डॉ. एचएस. जाट ने बताया- मोठ की चार नई किस्में तैयार की हैं। काजरी मोठ-4, 5, 6 और 7 नाम की ये किस्में तेज गर्मी और पानी की कमी में भी एक महीने से ज्यादा समय तक खेत में हरी-भरी और जिंदा रह सकती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ साल में अल नीनो और मौसम में हो रहे बदलाव के कारण राजस्थान के सूखे इलाकों में औसतन 100 मिलीमीटर तक बारिश कम हुई है। ऐसे हालातों को देखते हुए ही ये किस्में तैयार की गई हैं। अभी राजस्थान में मोठ की औसत पैदावार करीब 3.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि काजरी की नई किस्मों में करीब 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार मिली है। यानी कम बारिश वाले हालातों में भी किसानों को सामान्य से तीन गुना से ज्यादा पैदावार मिल सकती है। किसानों को अगले साल मिल सकता है नया बीज काजरी कृषि वैज्ञानिक हंसराज मेहला ने बताया- काजरी में मोठ के साथ ग्वार, मूंग और इसबगोल जैसी फसलों पर भी नई किस्में तैयार करने का काम चल रहा है। भारत सरकार ने 2024 में काजरी मोठ-4 और 5 को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद काजरी के वैज्ञानिकों ने 50 क्विंटल अच्छा बीज तैयार किया है। इस बार भारत सरकार के पोर्टल के जरिए 23 क्विंटल बीज की मांग आई है, जबकि काजरी फॉर्म पर करीब 40 क्विंटल बीज तैयार होने की उम्मीद है। किसान आगे की फसल के लिए बीज सुरक्षित रख सकेंगे हंसराज मेहला ने बताया- मोठ की ये वैरायटी उन्नत किस्म है। किसान एक बार खेत में लगाने के बाद अगली फसल के लिए सुरक्षित रख सकता है। बीज की क्वालिटी हाईब्रिड की तरह खराब नहीं होगी। इसमें एक वैरायटी में दूसरी वैरायटी का बीज मिक्स नहीं होना चाहिए, अगर ऐसा होता है तो उसकी क्वालिटी मेंटेन नहीं हो पाएगी। बीज निगम को बीज देने के साथ अलग से बीज तैयार किया जा रहा है। करीब 50 क्विंटल बीज तैयार किया जा रहा है, जो किसानों को सीधे दिया जाएगा। एक क्विंटल बीज करीब सात हेक्टेयर के लिए काफी होगा। एक महीने से बारिश नहीं, फिर भी फसल हरी डॉ. एच. एस. जाट ने बताया- नई किस्मों को पहले काजरी के जोधपुर फॉर्म पर आजमाया गया। यहां 10 जुलाई को मोठ की बुवाई की गई थी। इसके 23 दिन बाद 2 अगस्त को 86 मिलीमीटर बारिश हुई। 2 अगस्त की बारिश के बाद काजरी फॉर्म पर एक महीने से ज्यादा समय तक बारिश नहीं हुई। मौसम सूखा रहा। इसके बावजूद मोठ की नई किस्मों की फसल बिना नुकसान के हरी-भरी खड़ी हैं। उम्मीद है कि इतनी लंबी अवधि तक बारिश नहीं होने के बाद भी करीब 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार मिल सकती है। 25-30 दिन बाद हल चलाने से खेत का पानी बचता है डॉ. एचएस. जाट बताते हैं- इन किस्मों के पौधों में कम पानी में भी टिके रहने की खास क्षमता है। साथ ही बुवाई के समय पौधों के बीच सही दूरी रखी जाती है, ताकि हर पौधे को मिट्टी से पर्याप्त हवा, धूप और खाद-पोषक तत्व मिल सकें। बुवाई के 25 से 30 दिन बाद खड़ी फसल के बीच हल चलाया जाता है। इससे मिट्टी की ऊपर वाली परत टूट जाती है और जमीन के अंदर की नमी भाप बनकर उड़ने से बचती है। यही नमी अगली बारिश तक फसल को हरा रखने में मदद करती है। रेगिस्तान की मिट्टी को पानी और पोषण दोनों चाहिए डॉ. जाट ने बताया - रेगिस्तान की मिट्टी में पौधों के लिए जरूरी पोषण कम है और पानी भी कम मिलता है। इसलिए किसान खेत का पानी खेत में ही रोकें और जमीन की नमी बचाने पर ध्यान दें। अच्छी किस्म का बीज तभी अच्छी पैदावार देगा, जब खेत में घास-पूस यानी खरपतवार नहीं होगा। खरपतवार मिट्टी का पानी और पोषण खुद ले लेते हैं, जिससे फसल कमजोर हो जाती है।