राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में उतारी गई पीएम ई-बसों के संचालन में किमी का खेल सामने आया है। जेसीटीएसएल ने जिन रूटों की दूरी कागजों में तय कर रखी है, बसें सड़क पर उससे कम दूरी तय करती मिलीं। इसके बावजूद लॉगबुक और भुगतान की गणना में निर्धारित अधिक किमी ही दर्ज किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने दो रूटों पर बस में सफर कर पड़ताल की तो एक रूट में 3 किमी और दूसरे में 2 किमी तक का अंतर मिला। दोनों रूटों पर प्रतिदिन 74 किमी अतिरिक्त संचालन कागजों में दर्ज हो रहा है। 9 मीटर की ई-बस के लिए 61.50 रुपए प्रति किमी की दर से भुगतान होने के कारण केवल इन दो रूटों पर सालाना करीब 16.48 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान बनता है। यह आंकड़ा सिर्फ 15 बसों की गणना का है। सभी 30 बसों पर यही अनुपात रहा तो सालाना नुकसान करीब 33 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। अकेले रूट 1-ए पर कागजों में ज्यादा किमी के कारण सालाना 9.30 लाख का अतिरिक्त भुगतान रूट नंबर 1-ए में आने-जाने में 5 किमी ज्यादा दर्ज जेसीटीएसएल ने रूट नंबर 1-ए ट्रांसपोर्ट नगर से वीकेआई-17 नंबर की दूरी 21 किमी निर्धारित कर रखी है। बस की लॉगबुक में भी एक ट्रिप 21 किमी दर्ज होती है। भास्कर रिपोर्टर ने 21 अगस्त को बस नंबर RJ14PH7068 में सफर कर इसकी वास्तविक दूरी जांची। बस दोपहर 3 बजे ट्रांसपोर्ट नगर से रवाना हुई। रवाना होते समय मीटर पर 13,613 किमी थे। वीकेआई-17 पहुंचने पर मीटर 13,632 किमी हुआ। यानी दूरी 19 किमी रही। वापसी में वीकेआई-17 नंबर से 13,632 किमी पर बस चली और ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचने पर मीटर 13,650 किमी था। यानी वापसी की दूरी 18 किमी रही। इस तरह वास्तविक संचालन दोनों तरफ 37 किमी रहा, जबकि कागजों में दोनों ट्रिप की दूरी 42 किमी यानी 5 किमी ज्यादा दर्ज किया। रूट 4-ए में 25 किमी तय, मिला 23 किमी ही इसी तरह कानोता से चौमूं पुलिया रूट नंबर 4-ए की भी पड़ताल की गई। जेसीटीएसएल के रिकॉर्ड में इस रूट की दूरी 25 किमी दर्ज है। लेकिन बस में सफर के दौरान वास्तविक दूरी करीब 23 किमी मिली। यानी हर ट्रिप में करीब 2 किमी ज्यादा दर्ज हो रहा है। इस रूट पर रोज करीब 8 बसें चलती हैं। ये 16 ट्रिप करती हैं। हर ट्रिप में 2 किमी का अंतर होने से रोज 32 किमी अतिरिक्त संचालन दर्ज हो रहा है। इस हिसाब से रोज 1,968 रुपए का भुगतान किया हो रहा है। महीने में यह करीब 59,040 रुपए और साल में करीब 7.18 लाख रुपए होता है। इस तरह रूट 1-ए और 4-ए को मिलाकर सालाना करीब 16.48 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान बनता है। समझें रूट 1-ए का हिसाब 15 बसों की पड़ताल में सामने आया खेल, सभी 30 में हुआ तो आंकड़ा 33 लाख के पार पीएम ई-बसों के शुरुआती संचालन में 30 बसें शामिल हैं। भास्कर ने इनमें से 15 बसों से जुड़े दो रूट की पड़ताल की है। केवल इन दो रूटों में ही करीब 16.48 लाख रुपए सालाना का अंतर सामने आया। यदि बाकी बसों के रूट में भी इसी तरह वास्तविक और निर्धारित दूरी का अंतर मिलता है तो सालाना नुकसान 33 लाख रुपए से अधिक हो सकता है।