गर्भावस्था के दौरान जरा सी लापरवाही मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। कोटा में पिछले दिनों डिलीवरी के दौरान महिलाओं की मौत के बाद चिकित्सा विभाग ने गर्भवती महिलाओं में हाई रिस्क की पहचान का अभियान चलाया हुआ है। अभियान के तहत कोटा जिले में 77 गर्भवती महिलाओं में हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान की गई है। ऐसे में इन महिलाओं में जो समस्याएं सामने आ रही थी, उससे संबधित इलाज किया गया और किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि अभियान के दौरान 1,060 से ज्यादा गर्भवतियों की सघन प्रसव पूर्व (एएनसी) जांचें पूरी तरह निशुल्क की गईं। इस दौरान ज्यादातर मामले एनीमिया के सामने आए। खून की कमी से जूझ रही 797 महिलाओं को आईएफए की गोलियां और 72 को आयरन सुक्रोज दिया गया। वहीं, गंभीर रूप से एनीमिक महिलाओं को तुरंत राहत के लिए एफसीएम (फैरिक कार्बोक्सीमाल्टोज) के इंजेक्शन लगाए गए। निशुल्क जांच के लिए मां वाउचर कूपन दिए 579 महिलाओं में गर्भस्थ शिशु की धड़कन (फीटल हार्ट रेट) जांच की गई। मौके पर 3 सोनोग्राफी के अलावा अन्य गर्भवतियों को निशुल्क जांच के लिए मां वाउचर कूपन सौंपे गए। 1,062 गर्भवतियों के बीपी, 903 के तापमान और 1,056 महिलाओं के हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर व यूरीन की नि:शुल्क जांच की गई। शिविर में केवल जांच ही नहीं, बल्कि महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान दिखने वाले खतरे के लक्षणों और आपात स्थिति में 104 व 108 एंबुलेंस सेवा के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।