जन्म से ही सुनने और बोलने में अक्षम साढ़े तीन साल का जीवांशु अब सामान्य बच्चों की तरह सुन और बोल सकेगा। सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से मासूम के जीवन में नई रोशनी आई है। जीवांशु का आरबीएसके योजना के तहत जयपुर स्थित आरयूएचएस अस्पताल में निशुल्क इलाज हुआ है। जीवांशु की कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि आरबीएसके अर्बन कोटा की मोबाइल हेल्थ टीम ने इंदिरा गांधी नगर-1 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर नियमित स्क्रीनिंग के दौरान जीवांशु में कंजेनाइटल डीफनेस (जन्मजात बधिरता) के लक्षणों की पहचान की थी। इसके बाद टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्चे को आवश्यक जांच और विशेषज्ञ इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया था। मजदूर पिता के लिए संजीवनी बनी योजना मजदूरी करके गुजारा करने वाले जीवांशु के पिता विनोद मीणा ने बताया कि वह मजदूरी करके अपना और परिवार का पेट पालते हैं। ऐसे में आर्थिक तंगी के कारण महंगे इलाज का खर्च उठा पाना उनके लिए मुश्किल था। पिता ने बताया कि जीवांशु का जन्म 18 फरवरी 2023 में हुआ था। जब परिवार को बालक की जन्मजात बधिरता का पता चला, तो वे गहरे सदमे में आ गए। डॉक्टरों के अनुसार, कॉक्लियर इंप्लांट के बाद अब बच्चे को एक साल तक रेगुलर 'स्पीच थेरेपी' दी जाएगी, जिससे वह धीरे-धीरे ध्वनियों को समझना और बोलना सीख जाएगा। इस योजना के तहत 18 साल तक की आयु के बच्चों में जन्मजात बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर निशुल्क इलाज करवाया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 में जिले के अब तक 33 जरूरतमंद बच्चों की विभिन्न गंभीर जन्मजात बीमारियों की निशुल्क सर्जरी करवाई जा चुकी है।