कोटा में नगर निगम के मेयर चुनाव से ठीक दो दिन पहले चिकित्सा विभाग ने कांग्रेस के वार्ड 42 के पार्षद सियाराम वर्मा के क्लिनिक पर कार्रवाई की। बुधवार को बालिता रोड स्थित अंजलि हेल्थ केयर को लेकर चिकित्सा विभाग की टीम पहुंची। क्लिनिक पहले से बंद मिला। टीम ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत नोटिस चिपका दिया। इसके कुछ देर बाद कुन्हाड़ी थाने में पार्षद के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। बतादें, मेयर पद के लिए 25 सितंबर और डिप्टी मेयर के लिए 26 सितंबर को मतदान होना है। चुनाव से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। पार्षद बोला- 20 साल से चला रहा हूं क्लिनिक पार्षद सियाराम वर्मा ने कहा कि वे करीब 20 साल से क्लिनिक चला रहे हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई की है और वे खुद मरीजों का इलाज नहीं करते, बल्कि डॉक्टर की पर्ची के आधार पर इंजेक्शन और ड्रिप लगाने का काम करते हैं। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “ये लोग हमें दबाना चाहते हैं। नगर निगम मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में हम कांग्रेस के लोग कांग्रेस के उम्मीदवार को ही वोट देंगे।” सियाराम ने बताया कि चुनाव परिणाम आने के बाद 14 सितंबर से उन्होंने क्लिनिक खोला ही नहीं है। उनका कहना है कि ऐसे में बंद क्लिनिक को सीज करना गैरकानूनी है। पड़ोसियों से उन्हें जानकारी मिली कि चिकित्सा विभाग की टीम क्लिनिक पर नोटिस चस्पा कर गई। शिकायत के बाद पहुंची चिकित्सा विभाग की टीम पुलिस के अनुसार, ललित कुमार ने 23 सितंबर को सीएमएचओ कार्यालय में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बालिता रोड पर दो खंभों की छतरी के पास अंजलि हेल्थ केयर नाम से बिना वैध डिग्री और रजिस्ट्रेशन के क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। सीएमएचओ के निर्देश पर चिकित्सा विभाग की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची, लेकिन क्लिनिक बंद मिला। इसके बाद टीम ने नोटिस चिपका दिया। विभाग की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि क्लिनिक में बायोमेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जा रहा था, जिससे संक्रमण का खतरा हो सकता था। इन धाराओं में दर्ज हुई FIR कुन्हाड़ी थाने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. चंद्रप्रकाश कलवार की लिखित शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 271, 272, 318(4), 319(2) और इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 की धारा 15(2) और 15(3) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच ASI हरिओम मीणा को सौंपी गई है। क्लिनिक पर ये सुविधाएं उपलब्ध होने का दावा बालिता रोड स्थित अंजलि हेल्थ केयर के बाहर लगी जानकारी के अनुसार यहां BP-शुगर जांच, ड्रेसिंग, इंजेक्शन, ड्रिप और होम केयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सियाराम ने कहा कि रिजल्ट आने के बाद 14 सितंबर से अब तक मैं क्लिनिक खोल ही नहीं पाया। ऐसे में बंद क्लिनिक को सीज करके जाना गैर कानूनी है। मुझे तो पडोसियों से पता चला कि क्लिनिक पर चिकित्सा विभाग वाले नोटिस चिपका गए हैं। वोट बढ़ाने की तैयारी, ऊपर गुड फील कराना है 20 साल से चल रहा क्लिनिक अचानक बंद कर दिया गया। इस क्लिनिक को चलाने वाले नर्सिंगकर्मी अब कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद हैं। चिकित्सा विभाग में पहली बार केवल एक मामले में गजब की फुर्ती देखी गई? यह कार्रवाई ठीक वैसी ही है, जैसी चुनाव से पहले शिवपुरा में निर्दलीय प्रत्याशी कौशल किशोर के स्कूल पर की गई थी। सूत्रों ने बताया कि निगम चुनाव के परिणाम में मेयर बनाने के प्रति आश्वस्त होने के बावजूद भाजपा शांत नहीं बैठी है। प्रयास्र ऐसा किया जा रहा है कि कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग कराई जाए, ताकि प्रदेश स्तर पर बड़ा मैसेज जाए। चुनाव से ठीक 2 दिन पहले हुई इस कार्रवाई को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। उधर, पूरे घटनाक्रम पर चिकित्सा अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।