कोटा जिले में इस बार मौसमी बीमारियों का असर सामने आ रहा है। खासकर डेंगू और स्क्रब टाइफस के मरीज सामने आ रहे हैं। हालांकि पिछले साल की तुलना में केस अभी कम हैं, लेकिन यह वह आंकडा है जो चिकित्सा विभाग मान रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि जिले में जनवरी से अब तक के आंकड़ों की तुलना करें तो इस साल डेंगू के 93 केस आए हैं। वहीं स्क्रब टाइफस के 243 केस सामने आ चुके हैं। डेंगू केसेज के लिहाज से कोटा प्रदेश में तीसरे नंबर है। वह भी तब जब चिकित्सा विभाग कार्ड टेस्ट को मानता नहीं है। पहले अलवर और दूसरे नंबर पर जयपुर है। सिर्फ एलाइजा टेस्ट में पॉजीटिव पाए गए मरीजों को ही चिकित्सा विभाग काउंट करता है। पिछले साल स्क्रब टाइफस के 261 मरीज मिले थे सीएमएचओ डॉ.नरेन्द्र नागर के अनुसार इस बार टेस्ट ज्यादा हो रहे है इसलिए केस भी लगातार सामने आ रहे है लेकिन पिछले साल की तुलना में केसों में कमी आई है। उन्होंने बताया कि साल 2025 में इस अवधि के दौरान डेंगू के 171 मामले आए थे। वहीं पिछले साल स्क्रब टाइफस के 261 मरीज मिले थे, वहीं इस साल अब तक 243 मामले ही रिपोर्ट हुए हैं। पिछले साल मलेरिया के 11 केस दर्ज हुए थे, जो इस बार घटकर केवल 3 रह गए हैं। वहीं हाल ही में स्वाइन फ्लू के 7 पॉजिटिव मामले सामने आए थे, जिनकी सेंट्रल लैब से पुष्टि कराकर मरीजों को तुरंत दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। अलर्ट मोड पर है चिकित्सा विभाग सीएमएचओ डॉ. नागर ने बताया कि इस बार विभाग पहले से अलर्ट मोड पर है। इस बार बारिश में कमी रहने और दूसरा स्वास्थ्य विभाग की ओर से मार्च महीने से ही अलर्ट मोड पर काम शुरू कर देने से डेंगू के केस में कमी है। जिला कलेक्टर और चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें ग्राउंड पर काम कर रही हैं। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक हर सप्ताह समीक्षा बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निगरानी रखी जा रही है। 200 गड्ढों में छोड़ी गंबूशिया मछलियां मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए विभाग ने नवाचार करते हुए शहर और ग्रामीण इलाकों के ऐसे 200 गड्ढों व जलजमाव वाले स्थानों को चिह्नित किया, जहां मच्छर पनपने की आशंका अधिक थी। कीट वैज्ञानिक डॉ. डी.पी. चौधरी के सुझाव पर इन स्थानों पर दो बार गंबूशिया मछलियां छोड़ी गईं, जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उन्हें खत्म कर देती हैं। इसके अलावा डोर-टू-डोर सर्वे, एटी-लार्वा गतिविधियां और फॉगिंग कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में मौसमी बीमारियों से किसी भी मरीज की मौत दर्ज नहीं हुई है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन जैसी आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। आने वाले एक-दो महीनों तक मौसमी बीमारियों का दौर रहने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार एक्टिव मोड पर रहेंगी।