लोक अदालत ने कोटा विकास प्राधिकरण और NHAI को भी प्रमुख मार्गों, उपमार्गों तथा राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर स्पष्ट, सही, और बड़े स्पीड लिमिट और पार्किंग के साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने वकील सुजीत स्वामी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिए। कोर्ट ने शहर के नो पार्किंग जोन’ और जहां पार्किंग की अनुमति है, वहां स्पष्ट संकेतक लगाने के निर्देश दिए हैं। स्थाई लोक अदालत अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल, सदस्य प्रतिभा दिक्षित एवं कुसुम विजय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। NHAI भी लगाएगा स्पीड लिमिट बोर्ड स्थायी लोक अदालत ने NHAI को भी कोटा जिले में उसके क्षेत्राधिकार में आने वाले उपयुक्त स्थानों पर स्पीड लिमिट बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं कोटा शहर और ग्रामीण के पुलिस उप अधीक्षकों को नो-पार्किंग जोन में अवैध रूप से वाहन खड़े मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। 2025 में दायर हुई थी जनहित याचिका वकील सुजीत स्वामी ने सितंबर 2025 में पुलिस उप अधीक्षक कोटा शहर, कोटा ग्रामीण, NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर, KDA सचिव और नगर निगम आयुक्त के विरुद्ध याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि 1 अप्रैल 2022 से 22 जून 2023 तक जिले में ओवरस्पीडिंग के 1,06,274 चालान काटे गए। इसके बावजूद कई प्रमुख मार्गों पर स्पीड लिमिट के बोर्ड नहीं लगे हैं या कुछ स्थानों पर निर्धारित गति सीमा से अलग बोर्ड लगे हुए हैं। नगरीय क्षेत्र में अलग-अलग वाहनों की तय है गति सीमा याचिका में बताया गया कि जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट, कोटा की 5 जुलाई 2023 की अधिसूचना के अनुसार नगरीय/नगरपालिका क्षेत्र में चार पहिया वाहनों के लिए 60, तीन पहिया 40, दो पहिया 50 और ई-रिक्शा के लिए 30 किमी प्रति घंटा की गति सीमा निर्धारित है। स्कूल और अस्पताल के 300 मीटर दायरे में सभी वाहनों के लिए गति सीमा 25 किमी प्रति घंटा है। जिले की अन्य सड़कों पर चार पहिया के लिए 70, तीन पहिया 40, दो पहिया 50 और ई-रिक्शा के लिए 20 किमी प्रति घंटा की सीमा निर्धारित है। वहीं डाबी-कोटा-बारां, कोटा-बूंदी-झालावाड़, कोटा-सांगोद-बपावर, कोटा-रावतभाटा और कोटा-ताथेड़-सुल्तानपुर-इटावा-खतौली मार्गों पर चार पहिया वाहनों के लिए 90 और दो पहिया वाहनों के लिए 70 किमी प्रति घंटा की गति सीमा निर्धारित है। दादाबाड़ी में 20 किमी का बोर्ड, अदालत ने जताई आपत्ति वकील ने अदालत में दादाबाड़ी क्षेत्र की सड़कों के फोटो पेश किए, जिनमें 20 किमी प्रति घंटा की गति सीमा का बोर्ड दिखाई दिया। अदालत ने पाया कि कुछ स्थानों पर निर्धारित गति सीमा के विपरीत संकेतक बोर्ड लगे हुए हैं। विज्ञान नगर फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग को लेकर भी सवाल याचिका में गोबरिया बावड़ी से एरोड्रम चौराहे तक अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और यातायात अवरोध का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत के समक्ष विज्ञान नगर फ्लाईओवर के नीचे खड़े वाहनों के फोटो भी पेश किए गए। अदालत ने पाया कि वहां पार्किंग या नो-पार्किंग के स्पष्ट संकेतक बोर्ड दिखाई नहीं दे रहे थे।अदालत ने माना कि अव्यवस्थित तरीके से वाहन खड़े करने से यातायात बाधित होता है और आमजन के आवागमन में परेशानी होती है। स्पीड लिमिट की जानकारी नहीं होने से भ्रम की स्थिति एडवोकेट सुजीत स्वामी ने कहा कि ओवरस्पीडिंग के चालान होने के बावजूद कई स्थानों पर वाहन चालकों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि वहां अधिकतम कितनी गति से वाहन चलाना है। उन्होंने कहा कि याचिका के बाद कई स्थानों पर स्पीड लिमिट बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन कुछ जगह गलत गति सीमा वाले बोर्ड होने से भ्रम की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा कि सही और स्पष्ट संकेतक बोर्ड लगने से वाहन चालकों को निर्धारित गति सीमा की जानकारी मिलेगी और अनावश्यक विवाद कम होंगे। साथ ही अव्यवस्थित पार्किंग से यातायात प्रभावित होने के अलावा ईंधन की अतिरिक्त खपत और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।