कोटा महापौर अनुसूइया गोस्वामी ने कहा- अतिथियों और नेताओं के सम्मान में बड़े-बडे़ गुलदस्तों और हार कुछ समय में बेकार हो जाते हैं। महापौर ने भव्य गुलदस्तों (बुके) में होने वाले फिजूलखर्च और फूलों की बर्बादी पर चिंता जताते हुए अनूठी पहल का सुझाव दिया। मेयर अनुसुईया गोस्वामी रविवार को माहेश्वरी भवन में एक आयोजन में पहुंची थी। कार्यक्रम में जब उन्हें सम्मान स्वरूप बड़ा गुलदस्ता दिया गया तो उन्होंने उसकी उपयोगिता पर सवाल उठाए। महापौर ने कहा- 200 रुपए का बड़ा गुलदस्ता खरीदने की बजाय अगर 15 रुपए का एक गुलाब भेंट किया जाए, तो वह आम आदमी और कार्यकर्ता दोनों के लिए आसान होगा। बड़ा गुलदस्ता कुछ ही घंटों में सूखकर खराब हो जाता है, जबकि एक सुंदर गुलाब भी वही सम्मान और आत्मीयता देता है। इससे आर्थिक नुकसान भी नहीं होगा। उन्होंने कहा- सम्मान तो 20 रुपए के फूल से भी हो सकता है। कुछ देर बाद बडे़ हार और बुके यू हीं खराब जाते हैं। पैरों में कुचलते हैं गुलाब, भगवान पर चढ़ाने योग्य फूल का ऐसा अपमान क्यों मेयर अनुसूइया गोस्वामी ने कार्यक्रमों में होने वाली पुष्प-वर्षा और बड़ी मालाओं पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा- महापौर या किसी अति-विशिष्ट व्यक्ति के आने पर ऊपर से जो गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई जाती हैं। वे बाद में लोगों के जूतों और पैरों के नीचे आती हैं। जो फूल भगवान के चरणों में चढ़ाए जाते हैं, उन्हें इस तरह पैरों तले कुचले जाते देखना दुखद है। उन्होंने कहा- मैं मेयर के रूप में कहीं जा रही हूं। कार्यकर्ता हजार-दो हजार की माला बना रहा है। बुके ला रहा है उसके तो रुपए खर्च हो रहे हैं। वह खर्च मेयर थोड़ी दे रहा है। गरीब दुकानदारों को मिलेगा बढ़ावा गुलदस्तों पर रोक के अपने सुझाव पर सफाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल से माली या फूल विक्रेताओं का नुकसान नहीं होगा, बल्कि उनका रोजगार बढ़ेगा। उन्होंने कहा- जब स्वागत के लिए हजार-दो हजार रुपए के गुलदस्ते की जगह हर छोटा-बड़ा कार्यकर्ता 15 रुपए का गुलाब खरीदकर सम्मान कर सकेगा। इससे बिकने वाले फूलों की संख्या बढ़ेगी और गरीब दुकानदारों को सीधा फायदा पहुंचेगा।