कोटा में अनुसुईया गोस्वामी का महापौर बनना तय माना जा रहा है। वे बीजेपी से मेयर पद की उम्मीदवार हैं। दरअसल, कोटा के 100 वार्डों में से बीजेपी के 57 पार्षद हैं। वहीं, कांग्रेस के 39 और निर्दलीय 4 पार्षद हैं। ऐसे में बीजेपी को अपना मेयर बनाने में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। अनुसुईया गोस्वामी का नाम फाइनल करने लिए स्थानीय स्तर पर पार्टी लास्ट मिनट तक जद्दोजहद करती रही। नामांकन खत्म होने में चालीस मिनट का समय बचा था, तब जाकर उनके नाम के दो सेट जमा करवाकर प्रस्तावकों के जरीए नामांकन दाखिल किया गया। अनुसुईया गोस्वामी ने वार्ड 98 से कांग्रेस प्रत्याषी आयुष पारेता को चुनाव हराकर पार्षद पद पर जीत हासिल की थी। अनुसुईया का नाम पहले से मेयर के लिए चर्चा में था, लेकिन बाद में समीकरण बदलने लगे थे और उनका नाम पीछे हो गया था। प्रदेश नेतृत्व को मिले फीडबैक के बाद बदला था समीकरण बीजेपी ने पार्टी की तरफ से पार्षद प्रत्याशी घोषित किए थे, तब से माना जा रहा था कि अनुसुईया गोस्वामी मेयर बन सकती हैं। उनके चुनाव जीतने के बाद ये चर्चा तेज हो गई थी। बाद में अचानक से उनका नाम पीछे हो गया था। बीजेपी से जुड़े कार्यकर्ताओं के अनुसार प्रदेश नेतृत्व को मिले जमीनी फीडबैक के बाद समीकरण बदल गए थे। इस दौरान सीमा चौधरी का नाम अचानक से चर्चाओं में आया। लेकिन इधर, अनुसुईया गोस्वामी और उनके समर्थक नाराज हो गए। इसके बाद स्थितियां संभालने की कोशिश होने लगीं। हालांकि स्थानीय नेतृत्व में अनुसुईया को लेकर सहमति थी। ऐन वक्त तक समझाइश और चर्चा होती रही अनुसुईया गोस्वामी को लेकर स्थानीय पार्टी नेतृत्व राजी था, लेकिन ओबीसी महिला से कई प्रत्याशी जीत कर आईं। इनमें से ज्यादातर जातिगत आधार पर मानकर चल रही थीं कि उनका नाम मेयर के लिए तय होगा। ऐसे में पार्टी के सामने धडे़ बंटने की स्थिति हो गई। बीजेपी सूत्रों के अनुसार गोस्वामी भी नाराज हो गईं थी। इसके बाद पार्षदों से चर्चा की गई लेकिन पार्षदों में भी अलग अलग धडे़ हो गए थे। ऐसे में सभी पार्षदों की सहमति बनाने की कोशिश की गई। शुक्रवार रात को बाड़ेबंदी के लिए ले जाने तक भी आपसी सहमति नहीं बन सकी थी। फोन पर पूछा कि किसके नाम से अमानत राशि देना है शनिवार सुबह करीब 11 बजे तक सभी पार्षदों को चर्चा कर मनाया गया। इसके बाद अनुसुईया के नॉमिनेशन के लिए सेट तैयार करवाए गए। शनिवार दोपहर करीब 2 बजकर 40 मिनट पर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, दो प्रस्तावक लेकर निगम ऑफिस पहुंचे और नामाकंन दाखिल करवाया। नाम को लेकर पार्षदों में असहमति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नामांकन से पहले पार्टी का एक व्यक्ति नॉमिनेशन के लिए अमानत राशि तक लेकर पहुंच गया और वहीं से कॉल कर पूछा कि किसके नाम से अमानत राशि देनी है। हालांकि इसके कुछ देर बाद नामांकन दाखिल करवा दिया गया। सीमा चौधरी का नाम फाइनल था, अब नाराजगी वार्ड 83 से सीमा चौधरी का नाम भी काफी चर्चा में रहा। पार्षदों का मानना था कि सीमा का ही नॉमिनेशन होगा। ज्यादातर पार्षद इस नाम पर सहमत भी थे, ऐसे में अचानक से नाम कटने के बाद और अनुसुईया का नॉमिनेशन होने के बाद अब एक धड़े में नाराजगी हो गई है। स्थानीय नेता इस धडे़ को समझाने की कोशिश में लगे हैं। बगावत के डर से 10 महिला ओबीसी पार्षदों के नामांकन करवा लिए थे तैयार पार्टी में किसी भी तरह की अंदरूनी बगावत को रोकने के लिए बीजेपी ने सतर्क रणनीति थी अपनाई। पार्टी ने इतनी एहतियात बरती कि सभी 10 ओबीसी महिला पार्षदों के नामांकन पत्र एक ही स्थान से तैयार करवाए गए, ताकि अंतिम क्षणों तक किसी को भी यह भनक न लगे कि अंतिम मुहर किसके नाम पर लगी है। इनमें संजना झमटानी (वार्ड 80), कमलेश बाई (वार्ड 10), सुनिता सेन (वार्ड 57), प्रतिभा सुमन (वार्ड 64), प्रमिला वर्मा (वार्ड 84) और पुष्पा चौधरी (वार्ड 87) जैसे नाम शामिल थे।