नागौर जिले की कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन पद के चुनाव से ठीक पहले वार्ड-21 से निर्वाचित कांग्रेस पार्षद तेजपाल मिर्धा की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। एसीबी ने 8 साल पुरानी शिकायत के आधार पर तेजपाल मिर्धा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मिर्धा ने हाल ही में चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अंतरिम राहत दी है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने एसीबी जयपुर के अधिकारियों को अगली सुनवाई तक मिर्धा को FIR संख्या 0268/2026 में गिरफ्तार नहीं करने के निर्देश दिए हैं। गिरफ्तारी होने पर नहीं कर सकेंगे चेयरमैन चुनाव में वोटिंग याचिकाकर्ता की ओर से वकील रामावतार चौधरी और सुमेर सिंह गौड़ ने कोर्ट को बताया कि तेजपाल मिर्धा 14 सितंबर को कुचेरा नगर पालिका के वार्ड संख्या-21 से निर्वाचित हुए थे। उन्होंने चेयरमैन पद के लिए 16 सितंबर को नामांकन दाखिल किया था और चुनाव 21 सितंबर को होना है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि एसीबी द्वारा दर्ज FIR में गिरफ्तारी होने पर वे चेयरमैन चुनाव में वोटिंग नहीं कर सकेंगे। मामला वर्ष 2018 की एक शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2015 से 2018 के बीच नगर पालिका चेयरमैन रहते हुए मिर्धा ने अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मिलकर विभिन्न कार्यों में वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताएं कीं। याचिकाकर्ता के अनुसार, शिकायत के बाद 8 सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 18 सिंतबर को रात 11:58 बजे दर्ज की FIR याचिका में कहा गया कि मिर्धा के निर्वाचित होने और चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद 18 सितंबर को स्थानीय स्वशासन विभाग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत कार्रवाई की मंजूरी दी और इसके बाद एसीबी ने FIR दर्ज की। एफआईआर 18 सितंबर की रात 11:58 बजे दर्ज होने की बात भी कोर्ट के समक्ष रखी गई। राज्य सरकार ने गिरफ्तारी से संरक्षण का विरोध करते हुए कहा कि FIR में संज्ञेय अपराध सामने आते हैं और याचिकाकर्ता के पास सक्षम आपराधिक अदालत से अग्रिम जमानत लेने का विकल्प है। सरकार ने कहा कि जांच पहले से लंबित थी और एसीबी ने 24 अगस्त को धारा 17-ए के तहत मंजूरी मांगी थी, जिसके बाद 18 सितंबर को मंजूरी दी गई। अगली सुनवाई तक गिरफ्तार नहीं करने के निर्देश हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर फिलहाल यह संतोषजनक रूप से स्पष्ट नहीं है कि 2018 की शिकायत से संबंधित जांच करीब 8 साल तक लंबित क्यों रही और कार्रवाई की मंजूरी मिर्धा के निर्वाचित होने और नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद क्यों दी गई। हालांकि, कोर्ट ने इस स्तर पर एफआईआर को चुनाव प्रक्रिया में गैरकानूनी हस्तक्षेप या वैध कार्रवाई मानने पर कोई अंतिम राय नहीं दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका में आवश्यक संशोधन की स्वतंत्रता देते हुए एसीबी को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिए हैं।