भारत-पाकिस्तान के श्रीगंगानगर बॉर्डर पर 12 अक्टूबर को पाकिस्तानी ड्रोन से आरडीएक्स, हथियार और कारतूसों की ड्रॉपिंग के मामले में भास्कर बड़ा खुलासा कर रहा है। पड़ताल में सामने आया कि ड्रॉपिंग की इस डील के लिए पंजाब के सुखविंदर ने जिस मोबाइल का इस्तेमाल किया, वो एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के मुखबिर के जरिए उस तक पहुंचा था। उसने इसी से पंजाब के अलीका निवासी हैंडलर कुलवंत से बात की। उसने पाकिस्तान में अली चाचा से डील की और ड्रॉपिंग हुई। हालांकि एएनटीएफ का कहना है कि उनके पास हेरोइन की डील और ड्रॉपिंग होने का ही इनपुट था। हैरानी की बात यह है कि सुखविंदर पंजाब के जलालाबाद सिटी थाने में 12 सितंबर की रात हुए ग्रेनेड हमले में वांटेड है। भास्कर से बातचीत में पंजाब पुलिस ने भी इसकी पुष्टि की है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि सुखविंदर साथी लखविंदर के साथ 22 सितंबर से ही श्रीगंगानगर के 16 बीएलडी गांव में छिपा हुआ था। एएनटीएफ की टीम तब से ही इनके संपर्क में थी। बता दें कि मामले की जांच अब एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) कर रही है। मंगलवार सुबह एटीएस डीआईजी राममूर्ति जोशी श्रीगंगानगर पहुंचे। सभी एजेंसियों का ऑपरेशन सीमापार से आने वाला विस्फोटक देश में बहुत बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था। समय रहते सभी एजेंसियों ने मिलकर पेशेवर तरीके से इसका भंडाफोड़ किया।’ –विकास कुमार, आईजी-एएनटीएफ अभी पूछताछ चल रही है बॉर्डर पर ड्रॉपिंग के केस में पंजाब के जो दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, उनसे अभी पूछताछ चल रही है। इसमें जो भी नाम सामने आ रहे हैं उनकी तलाश की जा रही है।’ –दिनेश एमएन, एडीजी-एटीएस ड्रॉपिंग के समय 3 लोग थे; एक भागा, बाइक गायब श्रीगंगानगर बॉर्डर के पास चक 5 केएनएम में 12 अक्टूबर को रात 9:14 बजे 3 ड्रॉपिंग हुईं। मौके पर एएनटीएफ की टीम के अलावा सुखविंदर, लखविंदर और 16 बीएलडी गांव निवासी रघु मौजूद थे। तीनों 2 बाइकों से आए थे। कार्रवाई के लिए बीएसएफ और एएनटीएफ के आने से पहले रघु बाइक से भाग गया। सुबह 4:30 बजे दूसरी बाइक भी गायब हो गई। यह भी जांच की जा रही है कि जिस कार से ड्रॉपिंग करने वाली जगह की रेकी की गई, वह किसकी है? और अभी कहां है? 20 दिन पहले से एएनटीएफ के संपर्क में था वांटेड सुखविंदर और लखविंदर 22 सितंबर को 16 बीएलडी गांव के रघु से मिले। उसने दोस्त बज्जू के घर रुकवाया। दोनों तब से ही एएनटीएफ के तीन कर्मचारियों की निगरानी में थे। यहीं से आई 20 कार से रेकी के लिए गए। बज्जू का घर गांव के बाहर है। ड्रॉपिंग के बाद से दोनों गायब हैं। भास्कर इनके घर तक पहुंचा। घरवालों का जवाब था- पता नहीं। बज्जू की बेटी और पड़ोसी ने बताया कि बाहर से जो दो मेहमान आए थे, वे कुछ दिन पहले चले गए। 8209436*** नंबर से डील हुई थी, यह नोहर के दयानंद के नाम पर है एएनटीएफ ने 8209436*** नंबर सुखविंदर को दिया। यह सिम अक्टूबर 2025 में नोहर के वार्ड 10 की दिया मोबाइल शॉप से खरीदी गई थी। सिम दयानंद के नाम पर है। रिकॉर्ड में पिता का नाम सलूखी ऋषि और पता 115, स्टेशन रोड, नोहर है। तलाश में भास्कर जब नोहर पहुंचा तो यहां इस नाम का कोई व्यक्ति या पता नहीं मिला। बड़ा सवाल : अगर हेरोइन होती तो भी एएनटीएफ बड़ी कार्रवाई कैसे करती? यदि ड्रॉपिंग में हेरोइन ही आती तो भी एएनटीएफ बड़ी कार्रवाई कैसे करती? पाकिस्तान का सप्लायर अली चाचा तो पकड़ में आता नहीं। एजेंसी ने अली से डील करने वाले हैंडलर कुलवंत को पकड़ने के लिए भी जाल नहीं बिछाया। एएनटीएफ का पूरा फोकस सुखविंदर और लखविंदर पर ही रहा, जो 22 सितंबर से ही उसकी निगरानी में थे।