निकाय चुनाव में कुमावत समाज की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाते हुए समाज ने राजनीतिक दलों से दूरी बनाने का फैसला किया है। राजसमंद के कांकोरी में कुमावत समाज के भवन रणछोड़ चौकी पर सोमवार को महापंचायत बुलाई गई। महापंचायत में सुबह 11 बजे से जिलेभर के कुमावत समाज के लोग जुटे। कुमावत समाज के जिलाध्यक्ष सुंदरलाल दोराया ने बताया- समाज में राजनीतिक दलों को लेकर नाराजगी है। मीटिंग में जिले के पांचों चोखलों के अध्यक्ष और पदाधिकारी पहुंचे। निकाय चुनाव में समाज की कथित अनदेखी को लेकर पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई। महापंचायत में हमने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे समाज के पदाधिकारी इस्तीफा देंगे। घोषणा के तुरंत बाद प्रमुख पदाधिकारियों ने मंच से ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। वे संबंधित पार्टी जिलाध्यक्ष को जल्दी इस्तीफा सौंप देंगे। किसी दल को समर्थन नहीं, खुद मैदान में उतरेंगे जिलाध्यक्ष सुंदरलाल दोराया ने बताया- हमने फैसला किया है कि पंचायत और जिला परिषद के चुनाव में हम किसी भी पार्टी को समर्थन नहीं करेंगे। समाज अपने स्तर पर चुनाव लड़ेगा और रणनीति बनाकर प्रत्याशी मैदान में उतारेगा। पंचायत चुनाव ही नहीं बल्कि आगे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी हम किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करेंगे। न ही उनका प्रचार-प्रसार करेंगे। समाज का जो व्यक्ति इस फैसला का विरोध करेगा उस पर 5 लाख का जुर्माना लगाएंगे। उन्होंने कहा- अब वक्त आ गया है कि समाज एकजुट होकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाए। जिले में करीब 1 लाख मतदाता होने का दावा जिलाध्यक्ष सुंदरलाल दोराया ने बताया- राजसमंद, नाथद्वारा और आमेट क्षेत्र में कुमावत समाज के करीब 1 लाख मतदाता हैं। लगातार समाज की उपेक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर उचित भागीदारी नहीं मिलने से समाज में नाराजगी बढ़ती चली गई। मीटिंग में कुमावत समाज के अध्यक्ष सुन्दर लाल दोराया, महामंत्री सुन्दर लाल सिंगलवाल, कोशाध्यक्ष मोहन लाल माणनिया व तेजराम रेवाड़िया, प्रेमशंकर पालड़िया सहित जिले के पांचों चाोखलों के 84 गांवों के पंच पटेल मौजूद थे। बीजेपी के 9 पार्षद, कांग्रेस के 3 गौरतलब है कि राजसमंद नगर परिषद में कुमावत समाज के 9 पार्षद जीतकर आए हैं। बताया जा रहा है कि समाज सभापति पद की मांग कर रहा था लेकिन समाज से सभापति नहीं बनाया गया। वहीं कांग्रेस के 3 पार्षद हैं। फिलहाल यह तय नहीं है कि क्या पार्षद भी अपने पदों से इस्तीफे देंगे।