महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए शहर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था को ही मॉनिटरिंग की जरूरत है। अभय कमांड से जुड़े 708 कैमरों में से 309 बंद पड़े हैं। यानी 44% कैमरे काम नहीं कर रहे। इनमें 35 कैमरे ऐसे हैं, जो वर्ष 2023-24 से ही निष्क्रिय बताए जा रहे हैं। कई चौराहों और प्रमुख स्थानों पर लगे कैमरों तक इंटरनेट कनेक्शन नहीं पहुंचने से उनका लाइव फीड कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंच रहा। नतीजा इन चौराहों पर सुरक्षा के लिए खड़ा किया निगरानी सिस्टम ही ठप है। इन कैमरों को बीएसएनएल के जरिए इंटरनेट कनेक्शन दिया जाना था। लेकिन टेंडर ही नहीं किए गए। 22 कैमरे लगाए, कंट्रोल रूम भी बनाया; सिस्टम निष्क्रिय टोंक रोड पर लाल कोठी सब्जी मंडी अंडरपास और आसपास निगरानी के लिए करीब 22 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इनका फीड देखने के लिए नेहरू पैलेस के पास कंटेनर में कंट्रोल रूम बनाया गया। लेकिन इंटरनेट, तकनीकी व्यवस्था और नियमित रखरखाव नहीं होने से यह सिस्टम भी प्रभावी निगरानी नहीं कर पा रहा। कैमरे निष्क्रिय पड़े हैं। नेहरू पैलेस के पास कंटेनर में बने कंट्रोल रूम पर ताला कैमरों को चालू कराने के लिए पुलिस लगातार पत्राचार कर रही है। पिछले दो साल में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को 65 पत्र लिखे जा चुके हैं। पुलिस कमिश्नर स्तर से भी पिछले 7 महीने में 7 पत्र लिखे गए, लेकिन चालू नहीं हो सके। राजभवन से हाईकोर्ट तक के कैमरे बंद हैं बंद कैमरों की सूची में शहर के कई संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाके भी हैं। इनमें राजभवन चौराहा, विधानसभा के बाहर, राजस्थान हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 और 4, छोटी चौपड़, सांगानेर, ट्रांसपोर्ट नगर, गंगापोल, वैशाली नगर, चित्रकूट स्टेडियम, जगतपुरा, सीतापुरा, खातीपुरा, टोंक रोड, गुर्जर की थड़ी, एनआरआई सर्किल और प्रताप नगर सहित कई स्थान शामिल हैं। स्मार्ट सिटी और नगर निगम के भी 112 कैमरे बंद शहर के दूसरे निगरानी नेटवर्क भी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे। स्मार्ट सिटी के 408 कैमरों में 56 और नगर निगम के 184 कैमरों में 56 बंद हैं। यानी इन दोनों एजेंसियों के 112 कैमरे काम नहीं कर रहे। ऐसे में सवाल है कि करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए कैमरों को लगातार चालू रखने, इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और खराब होने पर समय पर दुरुस्त करने की जवाबदेही आखिर किसकी है?