फसल बीमा क्लेम घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि असली किसानों की जमीन पर दूसरे लोगों के नाम से फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कर करोड़ों रुपए का क्लेम उठाने के लिए लाडनूं-डेगाना SDM की सील-साइन का इस्तेमाल कर फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र तैयार किए गए। पुलिस ने मामले में बीमा कंपनी के दो कोऑर्डिनेटर को गिरफ्तार किया है। वहीं, पुनास कृषि पर्यवेक्षक के नाम की मुहर भी जब्त की गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड से असली किसानों के खेतों के खसरा नंबर और जमीन की जानकारी निकालते थे। इसके बाद उन जमीनों पर दूसरे लोगों के आधार कार्ड, बैंक खाते और कूटरचित दस्तावेज लगाकर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी करवाई जाती थीं। बाद में फसल खराबे की फर्जी सर्वे रिपोर्ट तैयार कराकर इन्हीं पॉलिसियों के आधार पर क्लेम उठाया जाता था। कंपनी के 3 प्रतिनिधियों से पूछताछ, 2 गिरफ्तार एएसपी और पुलिस टीम ने मामले में क्लस्टर कोऑर्डिनेटर, जिला कोऑर्डिनेटर और तहसील कोऑर्डिनेटर से पूछताछ की। जांच के बाद कंपनी के दो प्रतिनिधियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से फर्जी स्टाम्प पेपर, फसल बीमा फॉर्म सहित अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कंपनी के सर्वेयरों के जरिए असली किसानों की जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति के नाम से फर्जी बीमा पॉलिसियां करवाईं। इसके बाद फसल खराबे की फर्जी सर्वे रिपोर्ट तैयार कराई गई और उसके आधार पर क्लेम स्वीकृत करवाया गया। 5 थानों में 8 मामले दर्ज जिले में फसल बीमा घोटाले से जुड़े 5 थानों में 8 मामले दर्ज हैं। मेड़ता रोड, श्रीबालाजी, रेन, जायल सहित अन्य थाना क्षेत्रों में फर्जी तरीके से फसल बीमा क्लेम उठाने के आरोप सामने आए हैं। एसपी ने संबंधित थानों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और फर्जी क्लेम के जरिए कुल कितनी रकम उठाई गई है। ऑनलाइन रिकॉर्ड से निकालते थे किसानों की जमीन की जानकारी जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड से असली किसानों के खेतों के खसरा नंबर और जमीन से जुड़ी जानकारी निकालते थे। इसके बाद फर्जी पहचान वाले लोगों के नाम से उन्हीं जमीनों पर बीमा पॉलिसियां जारी कराई जाती थीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास मिले दस्तावेजों में फर्जी स्टाम्प और फर्जी हस्ताक्षर से तैयार किए गए कागजात भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं। फर्जी खराबा रिपोर्ट से क्लेम स्वीकृत कराया गिरोह पर आरोप है कि फर्जी बीमा पॉलिसी जारी कराने के बाद फसल खराबे की सर्वे रिपोर्ट भी फर्जी तरीके से तैयार कराई जाती थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बीमा क्लेम स्वीकृत कराया जाता था। यानी असली किसान खेतों में फसल उगाते रहे, जबकि उनकी जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर दूसरे लोगों के नाम पर क्लेम उठाया गया। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और अब तक उठाए गए क्लेम की कुल रकम का पता लगाने में जुटी है। --- संबंधित ये खबर भी पढ़िए … फर्जी फसल बटाईदार बनकर 2.89 लाख का बीमा क्लेम उठाया:SOG ने इंश्योरेंस कंपनी के क्लस्टर हेड समेत 3 को पकड़ा, 5 घंटे पूछताछ; 2 नई FIR नागौर में कार्रवाई करते हुए इंश्योरेंस कंपनी के तत्कालीन जिला कोऑर्डिनेटर अक्षय तिवारी, क्लस्टर हेड आदित्य पाटोदिया और विनीत कुमार दुबे को हिरासत में लिया। पूरी खबर पढ़िए 1 खेत, 4 बार उठाया फसल खराबा बीमा क्लेम:बटाईदार के खाते में भी आए 7 लाख से ज्यादा, इंश्योरेंस कंपनी पर शक, मंत्री बोले- FIR होगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में लाखों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में एक किसान ने एक ही खेत में एक ही फसल का 3 बार खराबा क्लेम उठा लिया। पूरी खबर पढ़िए