अलवर के टहला और राजगढ़ में 803 लोगों को 2515 बीघा सरकारी जमीन सिर्फ चार दिन में आवंटित कर दी गई थी। ये आवंटन थानागाजी से कांग्रेस विधायक कांतिप्रसाद मीणा की सिफारिश पर हुए थे। विधायक भूमि आवंटन सलाहकार समिति में थे, जिसमें प्रधान, तहसीलदार, बीडीओ सहित अन्य लोग भी थे। विधायक का नाम आने के बाद प्रशासनिक जांच धीमी हो गई। प्राथमिक जांच की दो बार रिपोर्ट आने के बाद भी एसीबी ने एफआईआर दर्ज नहीं की। आवंटन निरस्त होने के बाद भी कब्जे बरकरार हैं। कागजों पर विधायक व अन्य ने हस्ताक्षर के साथ दिनांक नहीं लिखी। तहसील के कागजों में भी तारीख का हेरफेर साफ नजर आ रहा है। बैकडेट में कागज बनाए जाने की आशंका को इसी वजह से बल मिलता है। पूरे मामले के खुलासे के लिए टहला तहसीलदार रहे हेमेन्द्र मीणा, एडीएम सुनीता पंकज व तत्कालीन कलक्टर नन्नूमल पहाड़िया की भूमिका की भी जांच होनी है। पहले जिला कलेक्टर स्तर पर और फिर प्रमुख सचिव टी.रविकांत की प्रशासनिक जांच पर एसडीएम केशव कुमार सहित 21 अधिकारियों को आरोप पत्र दिया, किसी को निलंबित नहीं किया। टहला में 3 खसरों में 1.25 हैक्टेयर सरकारी भूमि कमलेश, देवीसहाय और मोहन सहाय के नाम कर दी। आवेदन कमलेश का था, दो भाइयों के नाम बाद में जोड़े। घीलान में रामकिशोर को 0.80 हैक्टेयर भूमि दी, यह जमीन राडा व गैर मुमकिन तालाब किस्म की थी। दिसंबर में आवंटन, कागज मार्च में बने : मामला कांग्रेसराज में प्रशासन गांव संग अभियान का है। अभियान में भूमिहीन किसानों को कृषि भूमि आवंटित करने के नाम राजस्थान भू-राजस्व नियम 1970 की आड़ में 15 ग्राम पंचायत की 2515 बीघा सरकारी भूमि के 803 आवंटन जारी किए गए। अभियान 9 नवंबर 2021 से 5 जनवरी 2022 तक था। सारे आवंटन 4 दिन (28 फरवरी से 4 मार्च) के बीच हुए। विवाद होने पर कलेक्टर ने सभी आवंटन निरस्त किए। सरकार ने एसडीएम केशव कुमार व अन्य को आरोप पत्र दिए लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2.92 हैक्टेयर जमीन के मालिक राजीव लोचन को 0.30 हैक्टेयर सरकारी जमीन दी, सरिस्का प्रवेश द्वार पर रिसोर्ट सवालः आपको कितनी जमीन मिली थी, लोकेशन कहां है? जवाब- 30 एयर (3000 मीटर) जमीन रिसोर्ट में ही। सवालः लेकिन आवंटन तो निरस्त हो गया था, फिर? जवाबः एसडीएम कोर्ट के बाद अजमेर रेवन्यू बोर्ड में अपील कर रखी है। सवालः भूमिहीन किसानों को मिलती है जमीन, वो भी केवल एक बार। आपको को पहले भी जमीन मिली है? जवाबः वह जमीन तो बहुत वर्षों पहले मिली थी, कब मिली थी, मुझे तो अब ध्यान भी नहीं है। सवालः इतनी जमीन है, फिर सरकार से और जमीन क्यों मिले? जवाबः जब आवंटित जमीन के दोनों तरफ मेरी ही जमीन है तो सरकार बीच की जमीन को कहां लेकर जाएगी। इसी दीवार के बीच है यह जमीन। जंगल की ओर 500 मी. अंदर रविकांत को 4.5 बीघा जमीन, टहला के इसी रिसॉर्ट में 3 बीघा सरकारी भूमि अलॉट की सवालः आपका कब्जा कितनी जमीन पर है यहां पर? जवाबः साढ़े चार बीघा है। इसमें 3 बीघा जमीन सरकार ने आवंटित की थी। बाद में कोई ऑब्जेक्शन लगने से सभी आवंटन निरस्त कर दिए गए थे, मेरा भी आवंटन निरस्त किया था। सवालः आवंटन निरस्त हो चुका, कोई भी कब्जा हटाने कोई नहीं आया? जवाबः नहीं, अभी तक तो कोई कब्जे हटाने नहीं आया है। सवालः रिसोर्ट बनाया हुआ है, बुकिंग किस तरह होती है? जवाबः रिसोर्ट नहीं है, यह तो अपने परिवार के रहने के लिए ही बनाया है। (हालांकि यहां बागबानी हो रही है)। व्यवसाय के लिए तो मुख्य बाजार में अपनी दुकानें चल रही हैं। 5 बीघा के मालिक सरकारी कर्मी के परिवार के तीन जनों को नहर किनारे 11 बीघा सरकारी जमीन भी दे दी नैडोली में एक परिवार को तीन आवंटन किए, वो भी नहर किनारे। अभिषेक, उसकी मां विमला और दादी किस्तूरी के नाम जमीन दी गई। यहां पहले से कोई फसल कर रहा था, जिसे बेदखल किया। तारबंदी के प्रयास हुए, यहां काम रुका हुआ है। भास्कर ने आवंटन सूची के मुताबिक पड़ताल की तो ऐसे कई आवंटन मिले हैं, जिनमें जमीन गैर मुमकिन तालाब व गैर मुमकिन पहाड़ दर्ज है। आवंटन निरस्त होने के बाद भी कब्जा कायम है। मैंने तो रिकॉर्ड देखकर ही अनुशंसा की थी, सलाहकार समिति को दोषी माना है तो कार्रवाई करे और सरकार मौके से कब्जे हटाए। -कांतिप्रसाद मीणा, विधायक थानागाजी तथ्यों का परीक्षण कर रहे हैं। मामले में अभी एफआईआर का निर्णय नहीं लिया गया है। -गोविन्द गुप्ता, डीजी एसीबी