प्रदेशभर के सभी नगरीय निकायों और उदयपुर, जयपुर, जोधपुर व कोटा जैसे प्रमुख नगर निगमों के चुनाव परिणाम 14 सितंबर को आते ही सूबे की सियासत का केंद्र झीलों की नगरी उदयपुर भी रहेगा। क्योंकि, कांटे की टक्कर वाली निकायों में क्रॉस-वोटिंग और सेंधमारी से अपने कुनबे को बचाने के लिए भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य दलों ने अभी से उदयपुर के होटल्स व रिसॉर्ट्स में कमरों की एडवांस बुकिंग कराने के लिए आकर्षक पैकेज की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए उदयपुर के 20 से अधिक रिसॉर्ट्स-होटल्स में कमरों की एडवांस बुकिंग के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं। दरअसल, भौगोलिक सुरक्षा, अभेद्य प्राइवेसी और 2022 के राज्यसभा चुनाव के सफल प्रयोग के कारण उदयपुर नेताओं की पहली पसंद बना हुआ है। अरावली की पहाड़ियों में बसे एकांत रिसॉर्ट्स खरीद-फरोख्त से बचने और पार्षदों पर कड़ा पहरा रखने के लिए सबसे मुफीद हैं। 21 सितंबर को महापौर और 22 को उप-महापौर चुनाव तक ये पार्षद बाड़ेबंदी में कैद रहेंगे। बताया जा रहा है कि 11 सितंबर के मतदान के बाद 14 तारीख को जैसे ही विजेताओं को घोषणा होगी, उसी दिन शाम को जीते हुए प्रत्याशियों को बसों में बैठाकर सीधे उदयपुर भेज दिया जाएगा। वहीं, उदयपुर के पार्षदों को बाड़ेबंदी के लिए अजमेर-जयपुर के अलावा उदयपुर की सीमा से सटे गुजरात के रिसॉर्ट्स में ले जाने पर मंथन चल रहा है। ऐसे ही जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर में बाड़ेबंदी की तैयारियां चल रही हैं। निगम पार्षदों के लिए 25 हजारी विला, पालिकाओं को 5 हजारी कमरे निकायों के कद और बजट के हिसाब से पार्षदों की खातिरदारी की रणनीति तय की गई है। नगर निगमों का बजट सैकड़ों करोड़ का होने से महापौर पद के दावेदारों ने निगम पार्षदों के लिए 10 से 20 हजार रुपए प्रतिदिन वाले 3 व 4 स्टार लग्जरी रिसॉर्ट्स की तलाश तेज कर दी है। दूसरी तरफ, सीमित बजट वाली नगर परिषदों और पालिकाओं के पार्षदों के लिए 2 से 5 हजार रुपए प्रतिदिन किराए वाले होटल्स और रिसॉर्ट्स तलाशे जा रहे हैं। उदयपुर के होटल उद्योग को इस राजनीतिक बाड़ेबंदी से अचानक बुकिंग का बूस्ट मिलने की उम्मीद है। राज्यसभा चुनाव में ताज अरावली से शुरू हुआ था उदयपुर मॉडल: उदयपुर का बाड़ेबंदी कनेक्शन कोई नया नहीं है। जून 2022 के राज्यसभा चुनाव में जब चौथी सीट पर सुभाष चंद्रा के उतरने से क्रॉस-वोटिंग का खतरा मंडराया था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस व समर्थक निर्दलीय विधायकों को उदयपुर के ताज अरावली रिसॉर्ट में ठहराया था। अरावली की वादियों में हुई उस मजबूत बाड़ेबंदी का ही नतीजा था कि कांग्रेस अपने तीनों प्रत्याशियों रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को जिताने में कामयाब रही थी। सुरक्षा, पूर्ण प्राइवेसी और शहर से सुरक्षित दूरी के इसी उदयपुर मॉडल को अब निकाय चुनावों में दोहराया जा रहा है। इधर, 413 मतदान केंद्रों पर पुलिस का कड़ा पहरा नगर निगम के लिए 11 सितंबर को शहर में मतदान होंगे। इसके लिए 413 केंद्रों पर पुलिस जाब्ता तैनात रहेगा। संवेदनशील और अति संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त सशस्त्र बल लगाया जाएगा। क्विक रिस्पॉन्स मोबाइल पार्टियां, सुपरवाइजरी अधिकारी और रिजर्व पुलिस बल भी तैनात रहेगा। एएसपी उमेश ओझा ने बताया कि मतदान केंद्रों पर पुलिस जवानों के साथ एक होमगार्ड की तैनाती की गई है। संवेदनशील केंद्रों पर एक हेड कांस्टेबल और 4 कांस्टेबल का अतिरिक्त जाब्ता रहेगा। केंद्रों की निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी और सीआई स्तर के अधिकारी दौरा करेंगे। मतदान से पहले नाकाबंदी और वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च पुलिस ने बुधवार रात एसपी डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में मल्लातलाई व किशनपोल इलाकों में फ्लैग मार्च किया। इसमें एएसपी ओझा, थानाधिकारी, कालिका टीम, पर्यटन सुरक्षा बल ने हिस्सा लिया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। इससे पहले मंगलवार रात देहलीगेट, तीज का चौक, भड़भुजा घाटी, बड़ा बाजार, महावतवाड़ी, घंटाघर सिलावटवाड़ी और हाथीपोल में फ्लैग मार्च किया था।