स्वस्थ रहने के लिए थाली में क्या और कितना होना चाहिए, खाद्य पदार्थों में मिलावट कैसे पहचानें और पैकेटबंद सामान खरीदते समय लेबल क्यों पढ़ना जरूरी है, इन सवालों को लेकर जिले में ‘सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान’ अभियान शुरू किया गया है। 16 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, होटल-रेस्टोरेंट, कैंटीन और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान का संदेश है ‘सुरक्षित खाएं, स्वस्थ रहें, स्थानीय खाएं, मिलावट को हराएं। अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने विद्यार्थियों को स्वस्थ टिफिन, पौष्टिक आहार, हाथों की स्वच्छता और भोजन की बर्बादी रोकने के बारे में जानकारी दी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी, राजवीर चारण, एवं आराधना शर्मा ने राजकीय संस्कृत वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालय गहलोद, राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल किशनपुरा व द्वितीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय सिविल लाइन और राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल कोहना में जागरूकता गतिविधियां हुईं। विद्यार्थियों को पैकेटबंद खाद्य सामग्री लेते समय लेबल पर निर्माण व पैकिंग तिथि, बेस्ट बिफोर/एक्सपायरी डेट, सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीयन नंबर जांचने की सलाह दी गई। मोबाइल लैब से होगी मिलावट की जांच अभियान के दौरान मोबाइल खाद्य जांच प्रयोगशाला के माध्यम से दूध, घी, तेल, मसाले और मिठाइयों में मिलावट पहचानने के आसान तरीके बताए जाएंगे। आमजन को कम नमक, कम तेल और कम चीनी के सेवन के साथ स्थानीय व पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। भोजन की बर्बादी रोकने के लिए ‘उतना ही लें थाली में, जितना व्यर्थ न जाए नाली में’ का संदेश भी दिया जाएगा।