कासं|सवाईमाधोपुर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रियंका पारीक ने 70 वर्षीय वृद्धा से दुष्कर्म के मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी रूपसिंह कुमार (26) पुत्र रूपसिंह निवासी बैरवा बस्ती, सवाईगंज (थाना रवांजना डूंगर) को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। यह है पूरा मामला अपर लोक अभियोजक हरकेश मीना ने जानकारी दी कि 24 नवंबर 2024 को शाम करीब 8 बजे पीड़िता की पुत्रवधू ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 70 वर्षीय सास (जो आंखों से कम देख पाती हैं और पैर का ऑपरेशन होने के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं) बाड़े पर बने कमरे के बाहर छपरे में चारपाई पर सो रही थीं। इसी दौरान शराब के नशे में धुत आरोपी रूपसिंह वहां पहुंचा और वृद्धा को अकेला पाकर उनके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर आरोपी ने पीड़िता के मुंह पर मुक्का मारा, जिससे उनके मुंह पर सूजन आ गई और खून बहने लगा। पास ही मौजूद एक अन्य महिला और पुरुष शोर सुनकर डंडा लेकर मौके पर पहुंचे, तो आरोपी अपने कपड़े पहनकर भाग निकला। घटना के बाद सदमे और दर्द के कारण वृद्धा कुछ बोल नहीं पा रही थीं, लेकिन थोड़ी देर सामान्य होने पर उन्होंने रोते हुए परिजनों को पूरी आपबीती बताई। इसके बाद परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान के बाद न्यायालय में आरोप-पत्र पेश किया था, जिस पर सुनवाई पूरी करते हुए न्यायालय ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत यह सजा सुनाई है। प्रकरण में न्यायालय की तल्ख टिप्पणी: अभियुक्त ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने के आशय से उसके घर में घुसकर अपनी हवस की पूर्ति के लिए अंधा हो गया। अपनी दादी समान 70 वर्षीय वृद्धा का मुंह दबाकर उसके साथ दुष्कर्म कर घिनौना एवं घृणित कृत्य किया। पौराणिक एवं वैदिक काल से ही सनातन संस्कृति में वृद्धा, माता, गुरुपत्नी या समाज की किसी भी पूजनीय और बड़ी महिला के साथ जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाने को “अगभ्यागमन” (वर्जित) कहा गया है। शास्त्रों में इसे महापाप माना गया है। अभियुक्त द्वारा किया गया कृत्य अत्यंत ही गंभीर प्रकृति का है। ऐसे गंभीर अपराध के दुराचारी एवं बलात्कारी के प्रति नरमी का रुख नहीं अपनाकर कारावासीय दण्ड से दण्डित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।