कमजोर मानसून से पिछोला-फतहसागर झीलें इस बार पूरी तरह नहीं भर सकी हैं। इन्हें भरने वाले देवास परियोजना के बांध भी खाली हैं। इससे पैदा होने वाले पेयजल संकट से शहर को उबारने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) ने अभी से ‘मास्टर एक्शन प्लान’ लागू कर दिया है। विभाग का लक्ष्य अगले साल जुलाई (मानसून की आवक) तक शहरवासियों को बिना संकट के सुचारू पेयजल सप्लाई देना है। इसके तहत पिछोला-फतहसागर पर निर्भरता घटाकर पानी की बचत की जा रही है, ताकि वाष्पीकरण से पानी बर्बाद न हो। वहीं, इसकी भरपाई के लिए बड़ी तालाब, जयसमंद, खानों (माइंस) के पानी, शहर की बावड़ियों और नए ट्यूबवेल्स से रोजाना करीब 3.5 करोड़ लीटर (35 एमएलडी) अतिरिक्त पानी जुटाने का खाका तैयार किया गया है। 5 बैकअप प्लान... बड़ी, जयसमंद और माइंस से आपूर्ति बढ़ाएंगे भाप बनकर से बचाने को झीलों से उठाव कम किया कम गहराई और बड़े फैलाव के कारण पिछोला-फतहसागर में पानी तेजी से भाप बनकर उड़ता है। इसे बचाने के लिए विभाग ने दोनों झीलों से रोजाना होने वाला उठाव 1.90 करोड़ लीटर (19 एमएलडी) कम कर दिया है। पिछोला से पहले रोजाना 3.5 करोड़ लीटर पानी लिया जाता था, जिसे घटाकर अब 2.3 से 2.4 करोड़ लीटर कर दिया है। इसी तरह फतहसागर से पहले रोज 1.5 से 1.6 करोड़ लीटर उठाव होता था। यह अब घटकर 70 से 80 लाख लीटर किया गया है। जुलाई तक निर्बाध पेयजल सप्लाई करेंगे झीलों का जलस्तर सुरक्षित रखने के लिए पिछोला-फतहसागर से उठाव कम किया गया है। शहरवासियों को अगले साल जुलाई तक पेयजल संकट न झेलना पड़े, इसके लिए माइंस, बावड़ी, जयसमंद से प्रतिदिन 3.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी लाने की तैयारी है। -जेराराम, एक्सईएन (सिटी-1), पीएचईडी