लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दिल्ली में गुरुवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष कोई नया महाभियोग प्रस्ताव लाता है, तो उस पर नियमों और तय प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने पर उसकी जांच होगी। ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष अब तक दो बार नोटिस दे चुका है। पहली बार लोकसभा और राज्यसभा से नोटिस खारिज कर दिए गए थे। दूसरी बार राज्यसभा में दिए गए नोटिस पर अभी फैसला होना बाकी है। सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इसमें विपक्ष तीसरी बार ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव ला सकता है। विपक्ष समेत कई संगठन SIR में गड़बड़ी का आरोप लगाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तको लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह हटाए जा सकते हैं CEC मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही विशेष संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। प्रस्ताव को हर सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और मौजूद व मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन से पारित करना होता है। पद से हटाने का आधार साबित कदाचार या काम करने में असमर्थता होना चाहिए। केवल विरोध प्रदर्शन या इस्तीफे की मांग से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता। तीन सदस्यीय समिति करती है आरोपों की जांच जजों को हटाने से जुड़े 1968 के कानून के तहत प्रस्ताव स्वीकार होने पर लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यीय जांच समिति बना सकते हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कानून के क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल होता है। समिति आरोपों की जांच कर रिपोर्ट देती है। आरोप साबित होने पर भी पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद राष्ट्रपति पद से हटाने की औपचारिक कार्रवाई करते हैं। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सरकार इस महीने संसद का स्पेशल सेशन बुला सकती है, लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन बिल पेश करने का अनुमान केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इसमें लोकसभा सीटें बढ़ाने के लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल को पास कराया जाएगा। इनके जरिए महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…