महाराष्ट्र सरकार ने मराठी न जानने वाले ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया। गुरुवार को मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस दौरान ड्राइवरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर संगठनों ने फडणवीस से मुलाकात कर नियम का पालन करने के लिए और समय मांगा था। फडणवीस ने यह भी कहा कि मुंबई में काम करने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी की कामचलाऊ जानकारी जरूरी होने का संगठनों ने समर्थन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि ड्राइवर अलग-अलग उम्र के हैं और कई लोग लंबे समय से पढ़ाई से दूर हैं। इसलिए उन्हें मराठी सीखने में समय लग सकता है । महाराष्ट्र में मराठी सीखने से जुड़ा विवाद, 2 पॉइंट में जानें… 19 अगस्त: मंत्री का ऐलान, ऑटो ड्राइवर्स को मराठी सीखना अनिवार्य महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाईक ने ऐलान किया कि मराठी भाषा नहीं जानने वाले ड्राइवर अब महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी नहीं चला पाएंगे। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को पहले नोटिस देकर 3 महीने में मराठी सीखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी मराठी नहीं सीखने पर लाइसेंस और बैज सस्पेंड किया जाएगा। 24 अगस्त: मराठी सीखने के खिलाफ मुंबई में ऑटोवालों की हड़ताल मुंबई में ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने मराठी बोलने वाले नियम के विरोध में हड़ताल बुलाई। गैर मराठी भाषी ड्राइवरों का कहना है कि इससे उन पर ज्यादा बोझ पड़ेगा। उम्रदराज ड्राइवरों का कहना है कि हमने बिल्कुल पढ़ाई नहीं की है। हमारे सामने परिवार को पालने की चुनौती है। 55-60 साल की उम्र में हम परिवार पालें या नई भाषा सीखें। यह बहुत मुश्किल है। करीब 6 लाख ड्राइवरों को मराठी सिखाने की योजना सरकार के मुताबिक, महाराष्ट्र में करीब 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां हैं। इनमें बड़ी संख्या मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में चलती हैं। सरकार करीब 6 लाख ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना चाहती है। सरनाईक ने बताया कि कुछ महीने पहले शुरू किए गए इस अभियान में अब तक 1,65,601 ड्राइवर शामिल हो चुके हैं। ---------------------------------