जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को जमानत मिल गई है। महेश जोशी करीब 5 महीने बाद जेल से बाहर आ सकेंगे। एसीबी ने महेश जोशी को 7 मई 2026 को उनके घर से गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानत इससे पहले अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और सरकारी खजाने को पहुंचे करोड़ों रुपए के नुकसान का हवाला देते हुए महेश जोशी और पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित 8 आरोपियों की जमानत खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जोशी को इसी मामले में ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। उस समय भी जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। उस दौरान वे करीब 7 महीने जेल में रहे थे। 9 अप्रैल को पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था जेजेएम घोटाले में 9 अप्रैल 2026 को एसीबी ने जलदाय विभाग के पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। सुबोध अग्रवाल के बाद एसीबी ने जोशी को अरेस्ट किया था। एसीबी ने सुबोध अग्रवाल से जलदाय मंत्री रहते महेश जोशी की इस घोटाले में भूमिका को लेकर भी पूछताछ की थी। पूर्व मंत्री सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी जल जीवन मिशन (JJM) में हुए घोटाले को लेकर ACB की ओर से पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसमें जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन चीफ इंजीनियर राम करण मीणा, दिनेश गोयल, एडिशनल चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर निरिल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विशाल सक्सेना के नाम शामिल थे।