पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने से इनकार करने के लिए सरकार की आलोचना की। वे बोले- 'सरकार में सर्जिकल स्ट्राइक करने की हिम्मत तो है, लेकिन मुद्दों को सुलझाने की इच्छाशक्ति नहीं है।' मणिशंकर रविवार को श्रीनगर में 5वें 'हल्ला बोल' कॉन्क्लेव में मौजूद थे। उन्होंने सवाल किया- "हमारे पास पाकिस्तान के साथ बैठकर बातचीत करने की हिम्मत क्यों नहीं है, हम उनसे दोस्ती क्यों नहीं कर सकते?" कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अटारी-वाघा बॉर्डर पर बातचीत करने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि पुराने मुद्दों पर बहस करना विदेश नीति नहीं है। अय्यर ने यह भी कहा- ‘हम कहते हैं कि कूटनीति और बातचीत होनी चाहिए। लेकिन इकलौते पाकिस्तान के साथ ही हमारी कोई कूटनीति या बातचीत नहीं है।’ पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर के बाद 2025 से लेकर आज तक भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत केवल मई 2025 की DGMO वार्ता रही है। अय्यर का सुझाव वाघा-अटारी बॉर्डर पर चर्चा करें पाकिस्तान के साथ पिछले दौर की बातचीतों का जिक्र करते हुए अय्यर ने पूछा, "हम वहां जाने और उन्हें यहां आने देने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाते? अगर आपमें वह हिम्मत नहीं है, तो मेरा सुझाव है कि हम वाघा-अटारी पर मिलें। हमारी बॉर्डर लाइन पर ही एक टेबल रखी जाए ताकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान से बाहर न निकलना पड़े और हमें भारत से। और यह बातचीत जारी रखी जाए।" उन्होंने आगे कहा, "जहां भी कोई समाधान निकले, उस पर एक्शन हो। जिन मुद्दों का समाधान नहीं हो पाया है, उन्हें फिलहाल टाल दिया जाए।" कश्मीर पर अय्यर के 2 दावे देश की राजनीति पर बोले- गैर-हिंदुत्ववादी दल एक हो जाएं अय्यर ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में भी ऐसी ही एकजुटता जरूरी है और गैर-हिंदुत्व दलों को एक साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक पहले से मौजूद है और अगर 2024 के चुनाव में विपक्षी दल पूरी तरह एकजुट होते, तो उनके मुताबिक उन्हें बहुमत के लिए जरूरी 8 सीटें आसानी से मिल सकती थीं। अय्यर बोले कि अगर देश में आगे बढ़ना है, तो जिन लोगों या दलों की आपस में असहमति है, उन्हें एक साथ आना होगा। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… एयर चीफ मार्शल बोले-पाकिस्तान का J-35 फाइटरजेट चिंता की बात: भारत को हर साल 36-40 फाइटर जेट चाहिए; मौजूदा स्क्वॉड्रन घटकर 29 हुईं एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 3 अक्टूबर को पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यह चिंता की बात है, हमें इस कमी को पूरा करना होगा; अगर दूसरी तरफ J-35 मिल रहे हैं, तो हमें भी पांचवीं पीढ़ी के मिसाइल सिस्टम पर विचार करना होगा।” तेजस लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही देरी से भारतीय वायुसेना को नुकसान हो रहा है। मौजूदा हालात में चुनौतियों से निपटने के लिए हवाई ताकत बहुत जरूरी होती जा रही है और वायुसेना के पास फाइटर जेट स्क्वाड्रन की संख्या कम हो रही है। पढ़ें पूरी खबर…