दौसा जिले की धार्मिक नगरी मेहंदीपुर बालाजी में जलझूलनी एकादशी पर मंगलवार को ठाकुरजी की डोल यात्रा निकाली गई। सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सानिध्य में ठाकुरजी को पालकी और चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया गया। डोल गाजे-बाजे के साथ जलविहार के लिए कलकत्ता धर्मशाला स्थित जलसेन ले जाया गया। यात्रा के दौरान ठाकुरजी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। डोल यात्रा के आगे मंदिर के पंडित द्वारपाल के रूप में चल रहे थे, वहीं पुजारी चंवर ढुलाते हुए साथ चल रहे थे। जलसेन पहुंचने पर ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना कर जलविहार कराया गया और आरती की गई। इस दौरान पाठशाला मंदिर से आए ठाकुरजी के दोनों विग्रहों के डोल का जलसेन पर समागम हुआ। दोनों डोल के मिलन के साथ ही पूरा बालाजी धाम ‘हाथी, घोड़ा, पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ ठाकुरजी के दर्शन किए। 351 किलो राजगिरी हलवे का लगाया भोग आयोजन के दौरान ठाकुरजी को 351 किलो राजगिरी हलवे के साथ कलाकंद और फलों का भोग लगाया गया। पूजा-अर्चना एवं आरती के बाद मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। पूरे आयोजन के दौरान मेहंदीपुर बालाजी धाम का वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आया।