शहर को झाड़ोल-फलासिया के रास्ते गुजरात (ईडर) से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-58 पर पिछले 4 साल से बना जानलेवा संकट अब खत्म होने जा रहा है। मानसून में लगातार मलबे और चट्टानों के गिरने से बंद रहने वाले खेरिया घाटे को अब उत्तराखंड और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की तर्ज पर दुरुस्त किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी (एनएच विंग) ने इस घाट सेक्शन को सुरक्षित बनाने के लिए 30 करोड़ रुपए का टेंडर कर लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी कर दी है। वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद ठेकेदार कंपनी को एक साल के भीतर काम पूरा करना होगा। खेरिया घाटे के साथ ही उदयपुर-झाड़ोल मार्ग पर स्थित एक और खतरनाक पॉइंट रणघाटी के सुधार की भी तैयारी है। इस घाट सेक्शन को सुधारने पर करीब 70 करोड़ रुपए खर्च होंगे। विभाग ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर स्वीकृति के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, दिल्ली भेज दी है। अनुमति मिलते ही यहां का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। बता दें, खेरिया घाटे से गुजर रहे हाईवे पर साल 2022 में आए तूफान, उसके बाद तेज बारिश के कारण पहाड़ दरक गए थे। इससे आवाजाही ठप हो गई थी। दैनिक भास्कर ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। हालात: रास्ता ठप, लेकिन टोल चालू, रोज 10 हजार लोग जोखिम में झाड़ोल, फलासिया, कोटड़ा और गुजरात की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह हाईवे लाइफलाइन है। यहां रोज 3 से 4 हजार वाहनों की आवाजाही रहती है और इलाज, व्यापार या रोजगार के लिए 10 हजार लोग रोजाना उदयपुर शहर आते हैं। हाईवे का निर्माण पूरा कर टोल वसूली तो शुरू कर दी गई, लेकिन इन दोनों घाटों में आए दिन पहाड़ गिरने से रास्ता बंद हो जाता है। कई बसें व वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इस काम के पूरे होने से गुजरात जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों का सफर सुरक्षित हो जाएगा। जल्द जारी करेंगे वर्क ऑर्डर: पीडब्ल्यूडी खेरिया घाटे के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द वर्क ऑर्डर देकर एक साल में काम पूरा कराएंगे। रणघाटी की डीपीआर दिल्ली भेजी है। वहां से हरी झंडी मिलते ही दूसरा टेंडर जारी होगा। -मुकेश बलाई, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी (एनएच विंग) सॉइल नेलिंग तकनीक: पहाड़ों में ड्रिल कर छड़ें डालेंगे, फिर सीमेंट से ग्राउटिंग खेरिया घाटे में पहाड़ों को दरकने से रोकने के लिए स्लोप स्टेबिलाइजेशन किया जाएगा। इसमें सॉइल नेलिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसके तहत पहाड़ में गहरी ड्रिलिंग करके लोहे की मजबूत नेल्स (छड़ें) डाली जाएंगी और दबाव के साथ सीमेंट भरकर ग्राउटिंग की जाएगी। इससे चट्टानों और मिट्टी की पकड़ मजबूत हो जाएगी और भारी बारिश में भी मलबा सड़क पर नहीं गिरेगा। अमूमन टनल या अति-संवेदनशील पहाड़ी हाईवे पर इस्तेमाल होने वाली यह तकनीक दक्षिणी राजस्थान में किसी खुली सड़क पर पहली बार अपनाई जा रही है।