आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वस्थ रहना केवल नियमित व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए संतुलित खानपान, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, पर्याप्त नींद और सार्थक सामाजिक संबंध भी जरूरी हैं। इसी सोच के साथ कॉफी सूत्रा की ओर से ‘बियॉन्ड द रन- द लॉन्गेविटी रूट’ पहल का आयोजन किया गया। इसमें हॉस्पिटैलिटी, फिटनेस, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर स्वस्थ और सार्थक जीवन जीने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। फेयरमोंट मुंबई, जोश रन क्लब और द मिल्क लैब के सहयोग से आयोजित इस पहल में सुबह कम्युनिटी रन और कॉफी के साथ संवाद हुआ, जबकि दोपहर में ‘द लॉन्गेविटी टेबल’ के तहत विशेषज्ञ परिचर्चा आयोजित की गई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि रोजमर्रा की आदतें, शारीरिक सक्रियता, संतुलित पोषण और मानवीय संबंध जीवन की गुणवत्ता को किस तरह बेहतर बना सकते हैं। 3 और 5 किलोमीटर की दौड़ से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत सुबह जोश रन क्लब के सहयोग से आयोजित 3 और 5 किलोमीटर की कम्युनिटी रन से हुई। इसमें धावकों, फिटनेस और वेलनेस के प्रति जागरूक लोगों तथा आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया। दौड़ का समापन मालवीय नगर स्थित कॉफी सूत्रा में हुआ। यहां प्रतिभागियों ने कॉफी और हाई-टी के साथ एक-दूसरे से बातचीत की। इसके बाद फिटनेस से जुड़ी गतिविधियां, नेटवर्किंग और मीट एंड ग्रीट का आयोजन किया गया। इस दौरान कॉफी सूत्रा के संस्थापक दुष्यंत सिंह तथा फेयरमोंट मुंबई और रोजविन ग्रुप के जनरल मैनेजर राजीव कपूर ने प्रतिभागियों से संवाद किया। सुबह की इस गतिविधि में शारीरिक सक्रियता के साथ सामुदायिक जुड़ाव और लोगों के बीच संवाद को भी महत्व दिया गया। ‘द लॉन्गेविटी टेबल’ में बेहतर जीवन जीने के विज्ञान पर चर्चा दोपहर में सी-स्कीम स्थित रस्टिक रेस्टोरेंट में ‘द लॉन्गेविटी टेबल’ परिचर्चा आयोजित हुई। कॉफी सूत्रा के संस्थापक दुष्यंत सिंह ने इसका संचालन किया। ‘लंबा जीवन जीने की कला और बेहतर जीवन जीने का विज्ञान’ विषय पर हुई चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि दीर्घायु का अर्थ केवल अधिक वर्षों तक जीवित रहना नहीं है, बल्कि उन वर्षों में स्वस्थ, सक्रिय और संतुष्ट रहना भी उतना ही जरूरी है। परिचर्चा में राजीव कपूर, मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर डॉ. हिमांशी गहलोत, न्यूट्रिशनिस्ट आरजू सेठी, जोश रन क्लब के सह-संस्थापक श्रेष्ठ भारद्वाज और फिटनेस इन्फ्लुएंसर अदिति सिंह राठौड़ शामिल हुए। विशेषज्ञों ने शारीरिक गतिविधियों, संतुलित पोषण, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य, हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में वेलनेस की बदलती भूमिका तथा सामुदायिक जुड़ाव पर अपने विचार साझा किए। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में वेलनेस की भूमिका पर बात करते हुए राजीव कपूर ने कहा कि स्वास्थ्य और कल्याण को केवल जिम और स्पा जैसी सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए लोगों को अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक लोगों को अपने शरीर को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकती है, लेकिन जागरूकता और शिक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। जीवनशैली में स्थायी बदलाव की शुरुआत स्वयं को समझने, दृढ़ संकल्प लेने और रोजमर्रा की आदतों की जिम्मेदारी स्वीकार करने से होती है। उनके मुताबिक, हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को वेलनेस के व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर डॉ. हिमांशी गहलोत ने मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज लोग मोबाइल फोन, लगातार मिलने वाली सूचनाओं और सफलता के दबाव के कारण मानसिक रूप से विचलित रहते हैं। ऐसे में पर्याप्त नींद लेना, सार्थक मानवीय संबंध बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सहायता लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लंबा जीवन जीने का उद्देश्य केवल उम्र बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीना भी होना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करके जीवन की गुणवत्ता बेहतर नहीं बनाई जा सकती। इसके लिए अपनी भावनात्मक जरूरतों को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। कॉफी सूत्रा, रस्टिक-इंस्पायर्ड किचन, लामा और ऑन द हाउस के संस्थापक दुष्यंत सिंह ने कहा कि आज की जीवनशैली में ध्यान का भटकना एक बड़ी चुनौती बन गया है। लोग भविष्य की चिंताओं में इतने उलझ जाते हैं कि वर्तमान में मिलने वाली खुशियों का आनंद लेना भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर जीवन जीने के लिए अपने शरीर को समझना और पोषण तथा सप्लीमेंट्स के बारे में सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेना जरूरी है। बिना सोचे-समझे किसी चलन का अनुसरण करने के बजाय अपनी जरूरतों के अनुसार विकल्प चुनने चाहिए। जीवन में हर चीज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय संतुलन अपनाना अधिक उपयोगी हो सकता है।