नागौर के मुंदियाड़ में भगवान गजानन महाराज का मुख्य मेला आज भरेगा। मेले को लेकर शनिवार से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। नागौर शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐतिहासिक गणेश बावड़ी पहुंचे और यहां दर्शन के बाद अलग-अलग संघों के साथ करीब 35 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर मुंदियाड़ धाम पहुंचे। रातभर मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे। 300 साल पुरानी है पैदल यात्रा की परंपरा नागौर में गणेशोत्सव की परंपरा अन्य जगहों से अलग है। यहां गणेश चतुर्थी के बजाय अष्टमी के दिन गजानन महाराज की विशेष पूजा-अर्चना होती है। इसके बाद नवमी को मुंदियाड़ में विशाल मेला भरता है। करीब 300 साल से चली आ रही परंपरा के तहत श्रद्धालु गणेश बावड़ी से पैदल मुंदियाड़ धाम पहुंचते हैं। मुंदियाड़ से लौटने के बाद दशमी के दिन गणेश बावड़ी में गणपति दर्शन के साथ यात्रा का विधिवत समापन होता है। तांगा दौड़ की जगह अब साइकिल रेस और मैराथन मुंदियाड़ मेले की पुरानी पहचान तांगा दौड़ रही है। समय के साथ इसमें बदलाव हुआ और अब युवाओं के लिए साइकिल रेस और 10 किलोमीटर मैराथन का आयोजन किया जा रहा है। मेले के अंतिम दिन 27 सितंबर को तेजा दशमी के अवसर पर खरनाल में मुख्य मेला भरेगा। यहां प्रदेशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। छीतर पत्थर से बन रहा नया मंदिर मुंदियाड़ में गजानन महाराज के नए मंदिर का निर्माण कार्य भी जारी है। मंदिर का निर्माण जोधपुर के प्रसिद्ध छीतर पत्थर से किया जा रहा है। निर्माण में सीमेंट, बजरी और कंक्रीट का उपयोग बेहद कम किया जा रहा है। पत्थर और मार्बल पर कलाकृतियां, चित्रकारी और नक्काशी मंदिर की खास पहचान बनेगी। करीब 8 साल पहले शुरू हुआ निर्माण कार्य अब 85-90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। मंदिर में कुल 52 पिलर बनाए जा रहे हैं।