नागौर पुलिस ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की जमीन और खसरा नंबरों का दुरुपयोग कर फर्जी बीमा कराने के मामले में जांच तेज कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में जेल में बंद 7 आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर किसानों की जमीन से जुड़े दस्तावेज जुटाकर कूटरचित बंटाईदार दस्तावेज तैयार करने, उनके खेतों पर फर्जी तरीके से फसल बीमा कराने और क्लेम की राशि दूसरे खातों में उठाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, पहले दर्ज फर्जी फसल बीमा के मामलों की जांच के दौरान इन आरोपियों की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद उन्हें जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर बीमा कराने और क्लेम की राशि दूसरे खातों तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे। 7 आरोपियों को जेल से लाकर पूछताछ पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में सियाराम लोयल, ताराराम लोयल, अक्षय कुमार, सुबेदार, विनीत कुमार दुबे, आदित्य पाटोदिया शामिल हैं। सभी आरोपियों को अलग-अलग मामलों में जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया है। पूछताछ में पुलिस फर्जीवाड़े के नेटवर्क, दस्तावेज तैयार करने वालों और क्लेम की रकम के लेनदेन से जुड़ी कड़ियां खंगाल रही है। किसान की शिकायत से सामने आया फर्जी बीमा का खेल पुलिस के अनुसार, माडपुरा निवासी एक किसान ने शिकायत दी थी कि उसकी जानकारी के बिना उसके खेत की जमीन पर फसल बीमा कराया गया है। जांच में सामने आया कि किसान के खेत के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर किसी अन्य व्यक्ति को बंटाईदार दर्शाया गया और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फसल का बीमा कराने और बाद में क्लेम की राशि दूसरे खाते में उठाने का आरोप है। एक मामले में करीब 3 लाख 47 हजार 773 रुपए की बीमा क्लेम राशि फर्जी तरीके से उठाने की बात जांच में सामने आई है। बीमा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में पुलिस जांच में बीमा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि किसानों के नाम, खसरा नंबर और जमीन से संबंधित जानकारी जुटाकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी बीमा करवाकर क्लेम की राशि हासिल की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किसानों की जमीन से जुड़ी जानकारी कहां से हासिल की गई, फर्जी बंटाईदार दस्तावेज किसने तैयार किए, बीमा किस स्तर पर स्वीकृत हुआ और क्लेम की रकम किन-किन खातों में पहुंची। जिले में 37 FIR, अब तक 11 गिरफ्तार जांच अधिकारी सुरेश कुमार कस्वा ने बताया कि फर्जी फसल बीमा मामले में नागौर जिले के अलग-अलग थानों में अब तक 37 FIR दर्ज है। इन मामलों में 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामलों की जांच के लिए SIT भी गठित की गई है। जांच एजेंसियां फर्जी बंटाईदार दस्तावेज, बीमा पॉलिसी और क्लेम की राशि के बीच की कड़ियों को खंगाल रही हैं। शुरुआती मामलों में एक शिकायत से जुड़े 4.70 लाख रुपए से अधिक के फर्जी क्लेम का मामला भी सामने आया था। जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध क्लेम की बात सामने आने की जानकारी है।