नागौर में दिगंबर जैन समाज की ओर से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व का चौथा दिन शनिवार को उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर शहर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की। चंद्रप्रभु दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में ससंघ विराजमान परम पूज्य उपाध्याय विकसंत सागरजी महाराज का समाजजनों को आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि पवित्रता, शुचिता और निर्मलता ही उत्तम शौच धर्म के पर्याय हैं। शौच का अर्थ केवल शरीर की शुद्धि नहीं, बल्कि मन की शुद्धि भी है। उन्होंने कहा कि मन की शुद्धि लोभ कषाय के अभाव से होती है। लोभ सभी पापों को उत्पन्न करने वाला है, जबकि आशा और इच्छाओं का जाल जीव को दुखों की ओर ले जाता है। संतोष धारण करने वाला जीव ही सुख प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि जीव की वास्तविक शुचिता शील, जप, तप, ज्ञान और ध्यान के प्रभाव से होती है। केवल नदियों, सरोवरों या समुद्र में स्नान करने से आत्मा की पवित्रता नहीं होती। शरीर का स्वभाव ही अपवित्र है। इसके विपरीत दिगंबर जैन साधु बाहरी रूप से भले ही शरीर की सज्जा से दूर रहते हैं, लेकिन रत्नत्रय आदि गुणों के कारण उनका मन निर्मल होता है। आत्मा को उज्जवल करना ही शौच धर्म मुनि श्री ने कहा कि आत्मा में लोभ रूपी मल का अभाव होने से वास्तविक शुचिता आती है। मन को मायाचार, दूसरों से जलन, जीव हिंसा, परधन, परस्त्री की इच्छा और लोभ आदि से मुक्त कर निर्मल करना ही उत्तम शौच धर्म है। जैन शास्त्रों के अनुसार वीतराग सर्वज्ञ के परमागम का अनुभव कर अंतरंग मिथ्यात्व और कषाय रूपी मल को दूर करना ही उत्तम शौच धर्म है। पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया समाज के नथमल जैन ने बताया कि नौवें जैन तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान, जिन्हें सुविधिनाथ भगवान भी कहा जाता है, का मोक्ष कल्याणक दिवस भी मनाया गया। इस अवसर पर सभी जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान को निर्वाण लड्डू चढ़ाए गए। दिगंबर जैन नसियां में भगवान की विशेष शांतिधारा का सौभाग्य राजेश-रीना शाह को प्राप्त हुआ। समाज के रमेश चंद्र जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के पांचवें सोपान उत्तम सत्य धर्म की पूजा-अर्चना रविवार को सभी दिगंबर जैन मंदिरों में की जाएगी। कार्यक्रम उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागरजी महाराज के तत्वावधान में होगा