भारत के मसाला क्षेत्र को किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक बाजार की जरूरतों से जोड़ने के उद्देश्य से 5वीं नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस-2026 का जयपुर में आगाज हुआ। राजस्थान के नोवोटेल जयपुर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का विषय ‘किसानों का सशक्तिकरण, उपभोक्ताओं की सुरक्षा’ रखा गया है। सम्मेलन में किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, नियामक, शोधकर्ता और मसाला मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हुए। ऑल-इंडिया स्पाइसेस एक्सपोर्टर्स फोरम (एआईएसईएफ) के गैर-लाभकारी तकनीकी भागीदार द वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएसओ) की ओर से आयोजित सम्मेलन की शुरुआत प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुई। इसके बाद उद्घाटन सत्र में डब्ल्यूएसओ के अध्यक्ष रामकुमार मेनन, स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन, राजस्थान सरकार के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल और एनएससी की बिजनेस कमेटी के चेयरमैन गणपति के.डी. सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। किसानों के लिए अधिक मूल्य सृजन जरूरी : मेनन डब्ल्यूएसओ के चेयरमैन रामकुमार मेनन ने कहा कि भारत के मसाला क्षेत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि किसानों के लिए अधिक मूल्य कैसे बनाया जाता है और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला प्रत्येक उत्पाद सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्च मानकों को पूरा करे। उन्होंने कहा कि किसानों को मजबूत बनाने के प्रयासों को टिकाऊ उत्पादन, जिम्मेदार सोर्सिंग, ट्रेसेबिलिटी और बाजार तक पहुंच से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाकर समाधान साझा करने और भारत के मसाला क्षेत्र को अधिक मजबूत एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का अवसर दे रही है। गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा पर भी फोकस स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन ने कहा कि भारत का मसाला क्षेत्र ऐसे दौर में है, जहां किसानों की आजीविका मजबूत करने के साथ गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्पाइसेस बोर्ड विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारकों को उत्पादकता बढ़ाने, कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक, क्षमता निर्माण और जिम्मेदार उत्पादन पद्धतियों पर अधिक ध्यान देने से खेत के स्तर पर अधिक मूल्य बनाया जा सकता है और वैश्विक मसाला बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। सम्मेलन के पहले सत्र में ‘फार्मर एम्पावरमेंट एंड इनकम ग्रोथ’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें किसानों की आजीविका मजबूत करने, बेहतर बाजार संपर्क, तकनीक तक पहुंच और मूल्य श्रृंखला में किसानों के बेहतर एकीकरण के जरिए उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने पर जोर दिया गया। इसके बाद टिकाऊ उत्पादन और जिम्मेदार सोर्सिंग को लेकर चर्चा हुई। इसमें किसानों, एफपीओ, प्रोसेसर और खरीदारों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया।