ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए 12वीं के एक स्टूडेंट ने ऑटोमेटिक बस का मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल में बस को सड़क के ऊपर चलाने की कल्पना की गई है, जिससे नीचे की सड़क पर अन्य वाहनों के लिए जगह बनी रहेगी। छात्र के मुताबिक, बस को AI की मदद से भी ऑपरेट किया जा सकता है। मॉडल का उद्देश्य सड़क पर जगह घेरे बिना सार्वजनिक परिवहन को संचालित करना और ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना है। ये मॉडल डीडवाना-कुचामन की नांव सिटी के पीएम श्री सरकारी स्कूल के 12वीं साइंस के स्टूंडेंट परमेश्वर कुमावत ने बनाया है। इस बस से ना तो ट्रैफिक बढ़ेगा और भीड़ के दौरान भी सड़क पर आसानी से चल सकती है। ये बस सड़क के डिवाइडर के बीच में दो सपोर्टिंग पिलर के आधार पर चल सकती है। बस सड़क के ऊपर चलेगी, जबकि नीचे सामान्य वाहन बिना ट्रैफिक के चल सकेंगे। इससे पैसेंजर ट्रैफिक में फंसे बिना कम समय में पहुंच सकते है। इसके स्टेशन भी मेट्रो रेल की तरह फिक्स होंगे और बस की हाईट भी ऑटोमेटिक तरीके से जब चाहे तब पिलर को ऊपर या नीचे कर सकते है। अलग से बड़ी सड़क या ब्रिज बनाने की जरूरत नहीं परमेश्वर के अनुसार, ये बस बनती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए अलग से बड़ी सड़क या ब्रिज बनाने की जरूरत नहीं होगी। बस को सड़क के बीच मौजूद डिवाइडर के ऊपर बनाए गए सपोर्ट सिस्टम पर चलाया जा सकेगा। इसके स्टेशन मेट्रो की तरह सड़क के ऊपर बनाए जा सकते है। ट्रैफिक कम होगा, रास्ता भी नहीं रोकेगी बस मॉडल के अनुसार, शहरों में सड़क पर चलने वाली बड़ी बसों को हटाकर इस तरह की बसों का संचालन किया जा सकता है। इससे सड़क पर बसों द्वारा घेरा जाने वाला स्थान कम होगा और नीचे चलने वाले अन्य वाहनों को आवागमन के लिए ज्यादा जगह मिल सकेगी। मॉडल बनाने वाले छात्र परमेश्वर का कहना है कि इससे यात्रा का समय बचाने के साथ ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। AI से चल सकता है बस का ऑपरेटिंग सिस्टम इस बस को भविष्य में AI और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस करने की भी परिकल्पना की गई है। फिलहाल मॉडल में बस को ऑटोमेटिक चलाने की व्यवस्था नहीं है, लेकिन भविष्य में AI आधारित ऑटोमेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। सुरक्षा के लिए ऑटोमेटिक बैलेंसिंग सिस्टम विकसित करने की संभावना भी मॉडल में बताई गई है। सोलर प्लेट से करीब 25% ऊर्जा की पूर्ति बस में सोलर प्लेट लगाने की भी व्यवस्था की गई है। परमेश्वर के अनुसार, सोलर प्लेट बस को पूरी ऊर्जा उपलब्ध नहीं कराएगी, लेकिन इससे करीब 25% ऊर्जा की जरूरत पूरी करने की परिकल्पना है। दुर्घटना में एंबुलेंस और मिनी अस्पताल का काम मॉडल की खासियत इसका आपातकालीन इस्तेमाल भी है। बस को जरूरत के अनुसार एंबुलेंस, मिनी अस्पताल या फायर ब्रिगेड में बदला जा सकता है। बस में ही प्राथमिक उपचार शुरू करने की भी परिकल्पना है, जिससे अस्पताल पहुंचने से पहले उपचार शुरू हो सके।