जयपुर में 1 से 4 अक्टूबर तक ऑक्टेव 2026’ का सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से होगा। 4 दिवसीय आयोजन में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की लोक एवं शास्त्रीय कलाओं, संगीत, पारंपरिक परिधानों, शिल्प और खानपान की झलक देखने को मिलेगी। आयोजन का उद्घाटन 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे होगा। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक निहाल चंद गोयल भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।
राजस्थान में तीसरी बार होगा ऑक्टेव ‘ऑक्टेव’ केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना है। राजस्थान में इसका आयोजन तीसरी बार हो रहा है। इससे पहले 2012 में जोधपुर और 2016 में अजमेर में ऑक्टेव का आयोजन किया जा चुका है। करीब 10 साल बाद यह आयोजन फिर राजस्थान में लौट रहा है और इस बार जयपुर को इसकी मेजबानी मिली है। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि इस बार आयोजन में 8 राज्यों की संस्कृति को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में 250 से ज्यादा लोक कलाकार हिस्सा लेंगे, जिन्हें कोरियोग्राफर तरुण प्रधान तैयार करेंगे। आयोजन का आकर्षक एंबियंस कोलकाता के अनूप गिरी ने डिजाइन किया है। मणिपुरी रास और सत्रिया की शास्त्रीय प्रस्तुतियां आयोजन में पूर्वोत्तर की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। 2 और 3 अक्टूबर को मणिपुरी रास की प्रस्तुति होगी। राधा-कृष्ण के प्रेम और गोपियों की भक्ति पर आधारित इस नृत्य शैली में भाव, लय और शास्त्रीय गतियों का समन्वय देखने को मिलेगा। वहीं 3 और 4 अक्टूबर को असम की शास्त्रीय नृत्य परंपरा सत्रिया की प्रस्तुति होगी। वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रवर्तित सत्रिया में भक्ति और नाटकीय अभिव्यक्ति का अनूठा मेल दिखाई देता है। पूर्वोत्तर की विविध लोक परंपराओं को मंच पर लाने के क्रम में सिक्किम का सिंघी छम यानी स्नो लायन नृत्य और तमांग सेलो, त्रिपुरा का होजागिरी और ममिता तथा अरुणाचल प्रदेश का जुजु-झा-झा और ताई खामती नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को पूर्वोत्तर के अलग-अलग समुदायों की जीवनशैली, परंपराओं और लोक मान्यताओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। पारंपरिक परिधानों में दिखेगी 8 राज्यों की पहचान 1 और 2 अक्टूबर को एथनिक कॉस्ट्यूम शो आयोजित किया जाएगा। इसमें आठों राज्यों के पारंपरिक परिधान और आभूषण प्रदर्शित किए जाएंगे। परिधानों के माध्यम से वहां के अलग-अलग समुदायों की पहचान, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। वहीं 3 अक्टूबर को नागालैंड का समूह गायन होगा, जिसमें वहां की सामूहिक गायन परंपरा के साथ लोक और समकालीन संगीत के स्वर सुनाई देंगे। ‘ऑक्टेव’ के मुख्य आयोजन से पहले 28 सितंबर से सात दिवसीय नॉर्थ-ईस्ट पेंटर्स कैंप भी शुरू होगा। इसका आयोजन केंद्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है। शिविर में पूर्वोत्तर के 10 नामचीन कलाकार हिस्सा लेकर अपनी कलाकृतियां तैयार करेंगे। शिविर में त्रिपुरा से अभिजीत भट्टाचार्जी और निशान कुरी, असम से कौशिक कुंडू और प्रियम तालुकदार, मेघालय से बनियार्जिंगुमुत जीएल मावफलंग और ए इमोजेन फ्रांसेस्का वाहलांग, अरुणाचल प्रदेश से मारबा कामकी और एजुम रीबा, मिजोरम से लालजाव्मकिया तथा मणिपुर से राहुलदेव सीरम शामिल होंगे। आयोजन के दौरान 1 और 2 अक्टूबर को दो दिवसीय सेमिनार भी होगा। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से 12 शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ पूर्वोत्तर की कला, संस्कृति, सामाजिक जीवन, पारंपरिक कलाओं और बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश पर चर्चा करेंगे।